सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अमेच्योर कबड्डी महासंघ के प्रशासक एसपी गर्ग को 11 फरवरी तक निर्वाचित संस्था को कार्यभार सौंपने को कहा है. जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि हालांकि कुछ मुद्दे हैं जिन पर बारीकी से विचार करने की जरूरत है. जस्टिस एसपी गर्ग को 24 दिसंबर 2023 को AKFI के प्रशासन के लिए चुनाव में चुना गया था.
कोर्ट ने कहा वह ईरान में 20 फरवरी से 25 फरवरी तक होने वाली सीनियर एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप (महिला) 2025 में भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी की तात्कालिकता को देखते हुए यह आदेश पारित कर रही हैं. कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि महासंघ के प्रभार निर्वाचित निकाय को सौंपने के उसके आदेश को AKFI निकाय के चुनाव का समर्थन नहीं माना जा सकता है और मुद्दों को निर्णय के लिए खुला छोड़ दिया गया है. कोर्ट ने जस्टिस एसपी गर्ग के प्रयासों का कोर्ट ने सराहना भी की है.
3 मार्च को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने कहा कि उन्होंने AKFI के प्रशासन में पारदर्शिता लाने में सराहनीय काम किया है. कोर्ट 3 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम पूर्व न्यायाधीशों या नौकरशाहों के प्रशासक के रूप में बने रहने की प्रथा की निंदा करते है.
यह किसी के लिए भी अच्छा नहीं है. कोर्ट ने यह टिप्पणी महिला खिलाड़ियों प्रियंका और पूजा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की है. याचिका में एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप में भाग लेने की अनुमति मांगी गई थी. AKFI पर भी इस बात के संदेह के बादल मंडरा रहे थे कि AKFI को अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ ने इस आधार पर निलंबित कर दिया था कि इसका प्रबंधन निर्वाचित संस्था नहीं कर रही है.
वही केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ के साथ एक बैठक हुई थी, जिसमें आश्वासन दिया गया था कि एक निर्वाचित संचालन संस्था बनने की स्थिति में AKFI पर लगा निलंबन हटा दिया जाएगा. इससे पहले कोर्ट ने 4 फरवरी को कहा था कि भारतीय खेल महासंघों में निष्पक्षता, स्वायत्तता और स्वतंत्रता लाने की जरूरत है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


