मदुरै में CBI मामलों के लिए विशेष अदालत ने भारतीय ओवरसीज बैंक, पलायमकोट्टई ब्रांच (तमिलनाडु) के तत्कालीन चीफ मैनेजर श्री जी. बालासुब्रमण्यम और 4 निजी व्यक्तियों – श्री एन. कल्याणसुंदरम, सुश्री के. अन्नसरस्वती, श्री डी. मोहनराज और श्रीमती के. गीता – को बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी करार देते हुए 3 साल की कठोर कैद (RI) और कुल 6.8 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.
CBI ने यह मामला 24 सितंबर, 2010 को दर्ज किया था. आरोप था कि 2007-2009 के दौरान, भारतीय ओवरसीज बैंक के तत्कालीन चीफ मैनेजर श्री जी. बालासुब्रमण्यम और अन्य आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचते हुए बैंक को धोखा देने का षड्यंत्र किया. श्री बालासुब्रमण्यम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए और बैंकिंग नियमों का उल्लंघन कर, मुनाफाखोरी व भ्रष्ट साधनों से, मेसर्स कन्नबीरन पैकिंग इंडस्ट्रीज को 80 लाख रुपये की ओपन कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की.
अदालत ने सुनवाई आरोपियों को सजा
यह खाता जल्द ही गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) बन गया, जिससे 31 नवंबर 2011 तक बैंक को 1,26,91,515 रुपये का नुकसान हुआ.
जांच पूरी होने के बाद,CBI ने 28 दिसंबर, 2011 को आरोपियों के खिलाफ विशेष CBI अदालत, मदुरै में आरोप पत्र दाखिल किया. इसमें श्री जी. बालासुब्रमण्यम और अन्य निजी व्यक्तियों/उधारकर्ताओं को नामजद किया गया.
अदालत ने सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें 3 साल की कठोर कैद और 6.8 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. टूजी यह फैसला न्यायपालिका और सीबीआई की तत्परता को दर्शाता है, जो वित्तीय अपराधों पर सख्ती से लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
-भारत एक्सप्रेस
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