सांकेतिक तस्वीर.
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है.
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, रंजीत कुमार, अभिषेक मनु सिंघवी, दुष्यंत दवे, पी पीएस पटवालिया, राकेश द्विवेदी, मनिंदर सिंह, श्याम दीवान, प्रशांत भूषण, मीनाक्षी अरोड़ा और करुणा नंदी सहित अन्य वकीलों ने दोनों को का प्रतिनिधित्व किया. सुप्रीम कोर्ट कोलकाता हाई कोर्ट के उस आदेश पर आंशिक रोक लगा रखा है, जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक कोई ठोस कदम नही उठाएगी.
जनता का विश्वास गया तो कुछ नही बचेगा
कोर्ट ने कहा था कि यह एक बहुत सीमित मुद्दा है कि क्या पूरी परीक्षा रद्द कर दी जानी चाहिए थी या क्या हम उन उम्मीदवारों की पहचान करने में सक्षम थे, जिनके साथ गलत हुआ था. इसे जटिल नही बनाना चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अधिकारी 25,753 शिक्षको और गैर शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड बनाये रखने के लिए बाध्य है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा था कि सार्वजनिक नौकरी बहुत कम है. अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नही बचेगा.
यह व्यवस्थागत धोखाधड़ी है. सरकार नौकरियां बेहद कम है और उन्हें समाजिक गतिशीलता के रूप में देखा जाता है. अगर उनकी नियुक्तियों को भी बदनाम कर दिया जाए तो सिस्टम में क्या रह जाएगा. लोग विश्वास खो देंगे. आप इसे कैसे स्वीकार करेंगे. कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार के पास यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि डेटा उसके अधिकारियों द्वारा बनाए रखा गया था और इसकी उपलब्धता के बारे में पूछा गया था. कोर्ट ने राज्य सरकार के वकीलों से कहा था को या तो आपके पास देता है या आपके पास नहीं है. आप दस्तावेजों को डिजिटल रूप में बनाये रखने के लिए बाध्य थे. अब, यह स्पष्ट है कि कोई डेटा नही है.
-भारत एक्सप्रेस
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