भारत की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) 2024-25 की जीडीपी वृद्धि 6.3% तक पहुंचने का अनुमान है, जैसा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में सुधार, और भारत इंक की वित्तीय प्रदर्शन में सुधार ने इस वृद्धि को समर्थित किया है.
एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में आई मामूली गिरावट को एक अस्थायी ‘ब्लिप’ माना गया है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल जीडीपी वृद्धि 6.3% पर रहेगी, बशर्ते राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा पहले के आंकड़ों में कोई बड़ी संशोधन न किया जाए.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने समग्र आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों में गति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ग्रामीण कृषि मजदूरी में निरंतर वृद्धि, घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में वृद्धि, और रबी फसल की बुआई में सुधार इसके प्रमुख उदाहरण हैं.
इसके अलावा, कैपेक्स प्रवृत्तियाँ भी तीसरी तिमाही में सुधरी हैं. हालांकि कई राज्य अपने बजट अनुमानों के मुकाबले कैपेक्स कम कर रहे थे, लेकिन तीसरी तिमाही में सकारात्मक गति देखी गई, जो भविष्य के विकास के प्रति आशावाद को दर्शाती है.
India Inc के सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का विनिर्माण क्षेत्र, जिसे औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) से मापा जाता है, ने तृतीय तिमाही में 4.3% की वृद्धि दर्ज की, जबकि दूसरी तिमाही में यह 3.3% थी. इसके अलावा, India Inc ने पहली बार दो तिमाही में सकारात्मक EBITDA वृद्धि (44 आधार अंक) दर्ज की, जबकि कॉर्पोरेट सकल मूल्य वर्धित (GVA) में भी तिमाही दर तिमाही सुधार हुआ.
भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद, भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचा निवेश और सरकारी नीतियों के समर्थन से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में भारत की वृद्धि दर को FY25 और FY26 के लिए 6.5% के रूप में अनुमानित किया है.
एसबीआई का ‘नाउकास्टिंग मॉडल’
एसबीआई ने एक “नाउकास्टिंग मॉडल” विकसित किया है, जो 36 उच्च-आवृत्ति संकेतकों के आधार पर जीडीपी का अनुमान लगाने में मदद करता है. ये संकेतक औद्योगिक और सेवा गतिविधियों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक कारकों से जुड़े होते हैं. यह मॉडल 2013-23 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करता है.
- भारत एक्सप्रेस
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