राऊज एवेन्यु कोर्ट से पूर्व केंद्रीय मंत्री को राहत मिली है. स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने यह राहत दी है. कोर्ट ने दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ निचली अदालत को इंक्वायरी का आदेश दिया है. महिला द्वारा दर्ज एफआईआर पर दिल्ली पुलिस ने कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी. जिसे हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया था.
अदालत ने याचिका खारिज की
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जांच के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेज और वैज्ञानिक साक्ष्य को देखकर पता चलता है कि अभियोक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कभी एक-दूसरे से नही मिले. यहां तक कि घटना के दिन भी एक स्थान पर नही थे. ऐसे में अपराध होने की संभावना शून्य है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि 16 दिसंबर 2023 के निचली अदालत के आदेश में कोई खामी नहीं है और पुनरीक्षण याचिका खारिज की जाती है.
अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की
अदालत ने कहा था इसलिए क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के निष्कर्ष को बरकरार रखा जाना चाहिए. यह मामला एक महिला की शिकायत पर दर्ज किया गया था. शिकायत में पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा अन्य अपराधों के अलावा दुष्कर्म और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया गया था.जांच पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, जिसमें कहा गया है कि कोई भी मामला नहीं बनता है.
पूर्व मंत्री के खिलाफ केस रद्द
शिकायतकर्ता ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए एसीएमएम अदालत में याचिका दायर की थी. एसीएमएम ने याचिका को स्वीकार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ धारा 376, 328 और 506 के तहत अपराधों का संज्ञान लिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री को मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया था इसके बाद सत्र न्यायालय ने इस आदेश को रद्द कर दिया था.
इसके बाद शिकायतकर्ता ने क्लोजर रिपोर्ट की स्वीकृति को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उसे नशीली पदार्थ खिलाकर अप्रैल 2018 में दिल्ली के एक फॉर्म हाउस में उसके साथ बलात्कार किया. पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट दाखिल कर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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