Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

तीस हजारी कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार और हत्या मामले में पिता-पुत्र को दोषी ठहराया, पढ़ें क्या है पूरा मामला

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 2019 में नाबालिग बच्ची के बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपी राजेंद्र और उसके पिता सरन को दोषी करार दिया. अभियोजन पक्ष ने सबूतों के आधार पर सिद्ध किया कि आरोपी ने लड़की का अपहरण कर यौन शोषण किया और फिर हत्या कर शव को पार्क में फेंक दिया.

Court

तीस हजारी कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की की बलात्कार के बाद हत्या करने के जुर्म में पिता-पुत्र को दोषी ठहराया है. साथ ही दोषी के पिता को भी दंडित किया है, जिसने बच्ची की हत्या में उसकी सहायता की थी. लड़की 9 फरवरी, 2019 को लापता हो गई थी. उसका शव दो दिन बाद एक पार्क में मिला था तथा उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया ने कहा कि परिस्थितियां और अभियोजन पक्ष के साथ्य एक पूर्ण श्रृंखला पेश करता है. उससे निष्कर्ष निकलता है कि 27 वर्षीय राजेंद्र ने अपनी हवस पूरी करने के लिए लड़की का अपहरण किया और उसका यौन उत्पीड़न किया. उसका अपराध उचित संदेह से परे साबित हुआ है.

यह साबित हुआ कि वह व्यक्ति और उसका पिता क्रूर हत्या के लिए जिम्मेदार हैं. राजेंद्र को जहां बलात्कार, हत्या और अपहरण के अलावा पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया है, वहीं 57 वर्षीय सरन को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत दोषी ठहराया गया है.

अदालत ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि अपहरण के पीछे मकसद हवस थी. उसकी हत्या कर उसके शव को पार्क में गुप्त रूप से फेंकने के पीछे का मकसद कानूनी सजा से खुद को बचाना था. अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अभियोजक श्रवण कुमार बिश्नोई ने कहा कि राजेंद्र ने चिप्स का लालच देकर लड़की को बहलाया-फुसलाया और अपने घर पर उसका उत्पीड़न किया.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर AIIMS से मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital