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Supreme Court ने बर्खास्त महिला जजों को बहाल करने का दिया आदेश, जानें कोर्ट ने आगे क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बर्खास्त महिला जज सरिता चौधरी और अदिति कुमार शर्मा को बहाल करने का आदेश दिया. कोर्ट ने बर्खास्तगी को मनमाना और अवैध बताया, साथ ही न्यायपालिका में महिलाओं के लिए संवेदनशील कार्य वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया.

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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन द्वारा बर्खास्त महिला जज सरिता चौधरी और अदिति कुमार शर्मा को बहाल करने का आदेश दिया है. जस्टिस नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमने अदिति शर्मा के स्पष्टीकरण पर विचार किया है, कि उन्होंने अचानक शादी कर ली, उन्हें कोरोना हो गया, उनका गर्भपात हो गया और फिर उनके भाई को कैंसर हो गया. कोर्ट ने सरिता चौधरी और अदिति कुमार शर्मा की सीनियरिटी को बहाल करने का भी आदेश दिया है.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व न्याय की गुणवत्ता को बढ़ाएगा और व्यापक तरीको से लैंगिंक समानता को भी बढ़ावा देगा. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट की हाई कोर्ट की प्रशासनिक रिपोर्ट की बैठक के मिनट्स को देखने पर यह स्पष्ट है कि एसीआर में न्यायाधीशों के खिलाफ खराब प्रदर्शन आदि जैसी शिकायतें शामिल थी. यही कारण है कि यह निर्णय लिया गया कि इन दोनों अधिकारियों को सेवाओं में बने रहने की अनुमति नही दी गई.

बर्खास्तगी को बताया गया मनमाना और अवैध

हाई कोर्ट की रिपोर्ट में जजों के लगातार खराब प्रदर्शन को नहीं दिखाया गया है और यह इसके विपरीत बात करती है. एसीआर में अंतर्निहित विरोधाभास है. हमने माना है कि बर्खास्तगी से पहले अवसर दिया जाना चाहिए थी. इस प्रकार बर्खास्तगी दण्डात्मक, मनमाना और अवैध है.

कोर्ट ने कहा एसीआर में प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में महिलाओं के लिए एक सहायक और संवेदनशील कार्य वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया. इससे पहले जस्टिस बीवी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा था मुझे उम्मीद है कि पुरुष न्यायधीशों पर भी ऐसे मानदंड लागू किए जाएंगे मुझे यह कहने में कोई झिझक महसूस नही हो रही. महिला गर्भवती हुई और उसका गर्भ गिर गया. गर्भ गिरने के दौरान महिला को मानसिक और शारीरिक आधात झेलना पड़ा. काश पुरुषों को मासिक धर्म होता, तो उन्हें इससे संबंधित दुश्वारियों का पता चलता. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सितंबर में किए गए हस्तक्षेप के बाद बर्खास्त की गई छह में से चार महिला जजों को बहाल कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी महिला जजों को बहाल किया था

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2023 को कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला न्यायाधीशों की सेवाएं समाप्त किये जाने के मामले में स्वतः संज्ञान लिया था.  23 जुलाई 2024 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने के उसके फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था. जिसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्ण पीठ ने एक अगस्त को अपने पूर्व प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए चार अधिकारियों -ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तो के साथ बहाल करने का फैसला लिया था. जबकि सरिता चौधरी और आदित्य कुमार शर्मा को बहाल करने से इनकार कर दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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