दिल्ली में आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन लागू करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ले लिया है. जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील के मांग पर यह आदेश दिया है. दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने याचिका को वापस लेने के लिए कोर्ट से आग्रह किया, जिसे कोर्ट ने अनुमति दे दी. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दिया था.
पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि केंद्र सरकार की शक्तियां केवल 1, 2 और 18 है. हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य के पहलू पर शक्तियों को फिर से परिभाषित किया है. सिंघवी ने कहा था कि हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर साइन करने के लिए मजबूर किया है. केंद्र सरकार ने 60 फीसदी और पूंजीगत व्यय देती है, दिल्ली सरकार 40 फीसदी दे.
दिल्ली सरकार का विरोध और तर्क
सिंघवी ने कहा था कि दिल्ली हाई कोर्ट केंद्र सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य कैसे कर सकता है? दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन योजना को पूरी तरह से लागू करना होगा. ताकि राजधानी के लोगों को भी इस स्कीम का लाभ मिल सके. इस स्कीम के तहत मिलने वाले फंड और सुविधाओं से दिल्ली के लोग वंचित न रहे. कोर्ट ने 24 दिसंबर को यह आदेश दिया था.
कोर्ट का कहना है कि अगर आचार संहिता लागू हो भी जाती है तो इस एमओयू को साइन करना होगा. कोर्ट ने अगली सुनवाई के दिन इस एमओयू को पेश करने को कहा था. आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन केंद्र सरकार की योजना है, जिसका मकसद भविष्य की महामारी से निपटने के लिए पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है. दिल्ली सरकार ने अभी इस स्कीम को लागू नही किया है.
दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर कोर्ट की नाराजगी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने दिल्ली के हेल्थ सिस्टम को अपर्याप्त बताया था. कोर्ट ने कहा था कि अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की कमी है और जो उपकरण हैं वे भी काम नही कर रहे हैं. जरूरतमंद रोगियों के लिए सीटी स्कैन की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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