Nitish Katara Murder Case: साल 2002 के बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में तिहाड़ जेल में बंद दोषी विकास यादव की ओर से रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 2 अप्रैल को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि विकास यादव की फरलो की मांग वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की.
मामले की सुनवाई के दौरान नीलम कटारा की ओर से पेश वकील ने विकास यादव द्वारा रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका का विरोध किया. उन्होंने कहा कि विकास यादव की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है, लिहाजा रिहाई की मांग वाली याचिका को भी खारिज किया जाए.
जेल प्रशासन ने फरलो देने से किया इनकार
दूसरी ओर, विकास यादव ने दिल्ली में याचिका दायर कर फरलो की मांग की है, जो लंबित है. तिहाड़ जेल प्रशासन ने विकास यादव को फरलो देने से इनकार कर दिया था. अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्वीकृति उसके आचरण के मूल्यांकन के बाद हुई, जिसे असंतोषजनक माना गया.
विकास यादव को सजा काटते हुए 23 साल से अधिक हो गए हैं. निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ विकास और विशाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुनवाई के बाद कोर्ट ने विकास और विशाल की आजीवन कारावास की सजा को 25 साल की सजा में तब्दील कर दिया था.
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17 फरवरी 2002 को नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस हत्याकांड में विकास यादव और विशाल यादव को मौत की सजा देने से इंकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मामला केवल हत्या का है, न कि जघन्यतम अपराध का. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस मामले में आजीवन जेल में रखने की सजा भी नहीं दी जा सकती.
-भारत एक्सप्रेस
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