इस नई टैक्सी सेवा के अंतर्गत टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और फोर-व्हीलर ड्राइवरों को रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिलेगी. यह सहकारी मॉडल बाइक, कार और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए उपलब्ध होगा. अमित शाह के अनुसार, सरकार इस प्लेटफॉर्म को अगले कुछ महीनों में लॉन्च करने की योजना बना रही है. सबसे अहम बात यह है कि इससे होने वाला मुनाफा सीधे ड्राइवरों के पास जाएगा, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी.
सरकारी टैक्सी सेवा के आने से ग्राहकों को कम किराए पर बेहतर सेवाएं मिलेंगी. वहीं, ड्राइवरों को भी इस योजना से कई लाभ मिलेंगे, जो वर्तमान में निजी कंपनियों के तहत काम करने पर संभव नहीं हो पाते.
ग्राहकों और ड्राइवरों को मिलेंगे कई फायदे
कम कमीशन कटौती – आज के समय में ओला (OLA) और उबर (UBER) ड्राइवरों से 20-30% तक कमीशन वसूलती हैं. सरकारी सहकारी मॉडल में यह दर बहुत कम होगी.
बेहतर सुरक्षा और इंश्योरेंस – ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा के तहत स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलेंगी.
मुनाफे में हिस्सेदारी – इस सहकारी टैक्सी सेवा का लाभ सीधे ड्राइवरों तक पहुंचेगा, जिससे उनकी कमाई बढ़ेगी.
ओला-उबर को मिलेगी कड़ी चुनौती
ओला और उबर ने भारतीय कैब बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है, लेकिन उन्हें लगातार कई विवादों का सामना करना पड़ा है. ग्राहक अक्सर बढ़े हुए किराए और सर्ज प्राइसिंग से परेशान रहते हैं. वहीं, ड्राइवर कम कमीशन और अनुचित व्यवहार की शिकायतें करते आए हैं. इस नई सरकारी सेवा के आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक पारदर्शी एवं किफायती सेवाएं मिलेंगी.
कैसे काम करेगी यह सेवा?
सरकार इस नई टैक्सी सेवा को सहकारी मॉडल पर संचालित करेगी, जिसमें ड्राइवर ही मालिक होंगे. यह सेवा पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में होगी और किसी प्राइवेट एग्रीगेटर पर निर्भर नहीं रहेगी. इसके लिए सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है, जिससे ग्राहक आसानी से कैब बुक कर सकें. इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत होगी ट्रांसपेरेंट प्राइसिंग, जिससे कोई भी छिपे हुए चार्ज नहीं होंगे और ग्राहक को सस्ती दरों पर सुविधाएं मिलेंगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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