उत्तर प्रदेश के संभल के विवादित स्थल का रंगोरोगन कराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह याचिका सतीश चंद्र अग्रवाल ने दायर की थी. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि इस विवादित स्थल के रंगोरोगन की मांग पर आदेश उचित नहीं है. इसलिए हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
याचिका में कही गई ये बात
याचिका में कहा गया था कि क्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को हरिहर मंदिर, संभल जैसे स्मारकों या विवादित ढांचे के रखरखाव के लिए धन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, जिसपर जामा मस्जिद, संभल की प्रबंधन समिति के अवैध कब्जा है. याचिका में कहा गया था कि हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को विवादित ढांचे के बाहरी भाग की सफेदी पर हुए व्यय की राशि जामा मस्जिद संभल की प्रबंधन, समिति से वसूलने के निर्देश देना क्या उचित था, जबकि इससे हरिहर मंदिर, संभल के भक्तों को नुकसान पहुचेंगा.
कोर्ट ने दिया था ये निर्देश
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मार्च को एक हफ्ते में सफेदी करने का निर्देश दिया था और यह भी कहा कि काम पूरा होने के बाद इसका खर्चा इंतजामिया कमेटी एएसआई को देगी. अपने आदेश में कहा है कि शाही मस्जिद में तीन सदस्यीय कमेटी की निगरानी में रंग रोगन का काम होगा. कोर्ट ने कहा है कि एएसआई और वैज्ञानिक के अलावा प्रशासन के एक अधिकारी की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाए. कमेटी की जिम्मेदारी ये देखना होगा कि रंग रोगन के दौरान मस्जिद के स्ट्रक्चर को किसी तरह का कोई नुकसान न पहुचाया जाए और कमेटी को रिपोर्ट पेश करने को कहा था.
मस्जिद कमेटी ने बाहरी हिस्से में रंगाई पुताई की मांगी थी इजाजत
हालांकि कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही यह भी कहा है कि रंगाई-पुताई केवल मस्जिद के बाहरी हिस्सों में होगी. दरअसल मस्जिद कमेटी ने भी सिर्फ बाहरी हिस्से में रंगाई पुताई की इजाजत मांगी थी. हाई कोर्ट ने कहा कि मस्जिद की बाहरी दीवार पर लाइटिनिंग भी लगाई जा सकती है, लेकिन बिना मूल ढांचे को नुकसान पहुचाएं. 25 फरवरी 2025को जामा मस्जिद कमेटी के जाहिर असगर ने मस्जिद की रंगाई पुताई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
-भारत एक्सप्रेस
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