दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि शादी का वादा कर बलात्कार के मामलों में आरोपी यह तर्क देकर नहीं बच सकता कि दोनों के बीच उम्र में काफी अंतर होने को देखते हुए महिला को शादी से इनकार होने का अंदेशा होना चाहिए. जस्टिस स्वर्ण कांता ने यह टिप्पणी करते हुए आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया. आरोपी पर शादी का वादा कर एक बड़ी उम्र की महिला से बलात्कार करने का आरोप है.
आरोपी का पीड़िता से शादी करने का कोई इरादा नहीं- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि आरोपी का शुरू से ही पीड़िता से शादी करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन उसने शादी का झूठा वादा कर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया. इसे देखते हुए इस मामले में पूरी सुनवाई होने की जरूरत है, क्योंकि इस मामले में झूठे आसान के तहत यौन उत्पीड़न का प्रथम दृष्टया मामला बनता है. अभी इस मामले का प्राथमिकी रद्द करना अनुचित है.
महिला ने आरोपी के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी
कोर्ट ने महिला के बड़ी उम्र होने के दलील को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का तर्क पितृसत्तात्मक मानसिकता पर आधारित है. उन्होंने कहा कि इस तरह की दलील स्त्री द्वेष को दर्शाता है. महिला के अनुसार आरोपी उसका सहकर्मी था. उसने साल 2017 में उसका पीछा करना शुरू कर दिया था और उसे शादी के लिए प्रपोज किया. इस आसन के बाद महिला ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसे चार से पांच लाख रुपए भी दिए. बाद में आरोपी ने उससे शादी करने और पैसा वापस करने से इनकार कर दिया. इसके बाद महिला ने उसके खिलाफ साल 2021 में प्राथमिकी दर्ज कराई.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


