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निजी इक्विटी और एमएंडए में भारी उछाल, तीन वर्षों में सबसे अधिक डील हुई

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही में भारत के उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्र ने निजी इक्विटी और एमएंडए (विलय और अधिग्रहण) गतिविधि में व्यापक उछाल के बीच तीन वर्षों में सबसे अधिक सौदे हुए.

सांकेतिक तस्वीर.

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही में भारत के उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्र ने निजी इक्विटी और एमएंडए (विलय और अधिग्रहण) गतिविधि में व्यापक उछाल के बीच तीन वर्षों में सबसे अधिक सौदे हुए. इस क्षेत्र ने 3.8 अरब डॉलर के 139 सौदे किए, जो पिछली तिमाही की तुलना में मात्रा में 65 प्रतिशत की वृद्धि और मूल्य में 29 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. इस प्रदर्शन ने उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्र को मात्रा के हिसाब से सबसे सक्रिय क्षेत्र बना दिया, जो मुख्य रूप से छोटे-टिकट वाले लेन-देन और दो अरब डॉलर के सौदों की झड़ी से प्रेरित था.

दो अरब डॉलर की डील में एक टेमासेक द्वारा हल्दीराम में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का 1 अरब डॉलर का अधिग्रहण भी था, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़ा पैकेज्ड फूड लेनदेन था और सिंगापुर स्थित विल्मर इंटरनेशनल द्वारा अदाणी विल्मर के स्टेपल व्यवसाय का 1.44 अरब डॉलर का अधिग्रहण था. इन दोनों ने मिलकर इस क्षेत्र के कुल सौदे मूल्य में तीन-चौथाई से अधिक का योगदान दिया.

डीलमेकिंग में पिछली तिमाही की तुलना में वैल्यू में 66 प्रतिशत की वृद्धि

ग्रांट थॉर्नटन भारत की ड्यू डिलिजेंस पार्टनर शांति विजेता ने कहा, “निजी इक्विटी निवेश विविध क्षेत्रों में फैला हुआ था, जिसमें उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्र सबसे आगे थे, जो डील वॉल्यूम का 28 प्रतिशत और वैल्यू का 18 प्रतिशत था.” रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल (पीई/वीसी) डीलमेकिंग 11-तिमाही के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसमें 8.6 अरब डॉलर के 408 सौदे हुए. यह पिछली तिमाही की तुलना में वैल्यू में 66 प्रतिशत की वृद्धि है.

ई-कॉमर्स, फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी), टेक्सटाइल, अपैरल, एक्सेसरीज और पर्सनल केयर सेगमेंट ने सामूहिक रूप से डील वॉल्यूम का 63 प्रतिशत हिस्सा लिया. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि औसत डील साइज पिछली तिमाही के 34.8 मिलियन डॉलर से घटकर 27.2 मिलियन डॉलर रह गया.

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और प्राइवेट इक्विटी ग्रुप तथा डील्स टैक्स एडवाइजरी लीडर विशाल अग्रवाल ने कहा, “कुल मिलाकर, भारत में पूंजी बाजारों में नरम धारणा यह बताती है कि निवेशकों की रुचि बहाल करने के लिए मूल्यांकन को अधिक यथार्थवादी स्तर पर पहुंचना चाहिए, हालांकि अमेरिकी टैरिफ अपेक्षाओं से वैश्विक अनिश्चितता निवेशकों को यह देखने के लिए इंतजार करवाएगी कि आने वाले दिनों में चिप्स किस तरह से आगे बढ़ते हैं.”


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-भारत एक्सप्रेस



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