मथुरा के वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर के आसपास प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने 5 एकड़ भूमि के अधिग्रहण हेतु मंदिर की निधियों का उपयोग करने की अनुमति दे दी है. जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस एस. सी. शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें मंदिर निधियों से भूमि क्रय पर रोक लगा दी गई थी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो भूमि खरीदी जाएगी, वह मंदिर ट्रस्ट के नाम पर पंजीकृत की जाएगी. इसके साथ ही कोर्ट ने मंदिर के सिविल जज को निर्देश दिया है कि वह मंदिर प्रबंधन के लिए वैष्णव संप्रदाय से संबंधित, धार्मिक एवं वेदों का गहन ज्ञान रखने वाले रिसीवर की नियुक्ति करें. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि मंदिर के आंतरिक प्रबंधन में जिला प्रशासन या किसी भी सरकारी एजेंसी का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के लिए 500 करोड़ रुपये की विकास योजना तैयार की है. कोर्ट ने इस योजना का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन किया और भूमि खरीद की अनुमति दी, हालांकि यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए.
प्रस्तावित कॉरिडोर वृंदावन में वर्तमान मंदिर की 5.65 एकड़ परिधि में तैयार किया जाएगा. इस फैसले की पृष्ठभूमि 2022 की उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से जुड़ी है, जब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मंगला आरती के दौरान भगदड़ में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. इसके बाद सरकार ने भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कॉरिडोर निर्माण की योजना बनाई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मथुरा और वृंदावन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो हर साल लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं. ऐसे में वहां बेहतर बुनियादी ढांचे जैसे चौड़ी सड़कें, पार्किंग, धर्मशालाएं, अस्पताल और सार्वजनिक सुविधाओं की तत्काल जरूरत है.
-भारत एक्सप्रेस
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