दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि ‘हराम‘ शब्द का अर्थ कुछ ऐसा है जो गलत तरीके से कमाया गया हो. यह किसी भी मेहनती महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए पर्याप्त है. इसके अलावा इस शब्द का इस्तेमाल सिर्फ किसी को अपमान करने के लिए ही नहीं किया जाता है. तीस हज़ारी कोर्ट के जेएमएफसी करणबीर सिंह ने उक्त टिप्पणी करते हुए आईपीसी की धारा 509 के तहत एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है. उसके तहत दोषी व्यक्ति को तीन साल की साधारण कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है.
इस मामले में एक व्यक्ति ने महिला से कहा था कि वह हराम का माल लेकर आ गई है, कितने से करवा के आई है. इसपर आरोपी के वकील ने अदालत से कहा था कि इस मामले में किसी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है. सिर्फ शिकायतकर्ता महिला के बयान ही में यह बात कही गई है.
शिकायतकर्ता के बयान को अदालत ने माना ठोस और भरोसेमंद
न्यायाधीश ने वकील के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि उसके तर्क में कोई दम नहीं है. महिला ने अपने इकबालिया बयान में स्पष्ट रूप से उक्त बात कही है जो ठोस, विसनीय व भरोसेमंद है. उन्होंने कहा कि हराम शब्द एक महिला की विनम्रता का अपमान करता है. क्योंकि यह दर्शाता है कि उक्त महिला वफादार नहीं है.
अदालत ने यह भी कहा कि ‘कितने से करवा के आई है‘ शब्द कोई साधारण अपमान नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक महिला के चरित्र पर सीधा प्रहार करता है. इस शब्द का अर्थ यह है कि महिला अनैतिक है और यह उसके चरित्र पर आक्षेप लगाता है.
इससे किसी भी महिला की गरिमा का अपमान होना स्वाभाविक है. इन शब्दों का यह भी मतलब है कि वह कई लोगों के साथ वह यौन संबंध बना रही है. इसलिए अदालत का मानना है कि आरोपी के कहे गए शब्दों का उद्देश्य शिकायतकर्ता की गरिमा का अपमान करना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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