सुप्रीम कोर्ट ने विदर्भ हॉकी एसोसिएशन द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें खुद को हॉकी इंडिया और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) में सहयोगी सदस्य के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी. कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हॉकी एक ओलंपिक खेल है और भारतीय ओलंपिक संघ के नियमों के अनुसार प्रत्येक राज्य से केवल एक ही मान्यता प्राप्त एसोसिएशन हो सकती है.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह फैसला सुनाया. सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से यह सवाल भी किया कि जब हाईकोर्ट का आदेश जून 2024 में आया था, तो एसएलपी मई में क्यों दाखिल की गई और फिर उसे छुट्टियों में सूचीबद्ध करवाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “आज जो मामले सूचीबद्ध हैं, उनमें से 70 फीसदी ऐसे हैं जिनकी सुनवाई बाद में भी हो सकती थी. आप लोगों ने हमें रातभर बैठकर फाइल पढ़ने के लिए मजबूर कर दिया.”
कोर्ट ने आगे पूछा कि जब यह मामला पहले ही नियमों के दायरे में आता है, तो रिट याचिका पर कोर्ट कैसे राहत दे सकता है?
इसके जवाब में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि वर्ष 2013 में विदर्भ हॉकी एसोसिएशन वास्तव में हॉकी इंडिया का सहयोगी सदस्य था. वकील ने दावा किया कि उस सदस्यता को मनमाने तरीके से, उस धारा के तहत समाप्त कर दिया गया जो संस्था पर लागू ही नहीं होती थी. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में 20 से अधिक सहयोगी सदस्य मौजूद हैं, इसलिए उनके मुवक्किल को भी मान्यता मिलनी चाहिए.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के सभी तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि नियमों के अनुसार एक राज्य से एक ही अधिकृत एसोसिएशन को मान्यता दी जा सकती है, और इस सिद्धांत से कोई छूट नहीं दी जा सकती. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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