इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी फतेहपुर से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि कोर्ट के दो बार आदेश के बावजूद गांव सभा व सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण क्यो नही हटाया गया.यदि नहीं हटाया तो धारा 67की कार्यवाही का तार्किक निष्कर्ष देते हुए तय करें कि अतिक्रमण किया गया है या नहीं.
कोर्ट ने खलिहान, तालाब,बंजर व ऊसर जमीन पर अतिक्रमण के आरोपी विपक्षी को नोटिस जारी कर राज्य सरकार सहित विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा है.अगली सुनवाई 30मई को होगी.
यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की एकलपीठ ने फतेहपुर के ब्लाक भिटौरा,जिला फतेहपुर के निवासी फूलचंद्र मौर्या की जनहित याचिका पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बहस की.
राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई का आदेश
याची की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने 9मई 18को निर्देश दिया था कि राजस्व संहिता की धारा 67की कार्यवाही 90 दिन में पूरी करे. इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई तो 2024मे छः साल बाद दुबारा जनहित याचिका दायर की गई.तो फिर से कोर्ट ने धारा 67की कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया. कहा गया कि एक प्लाट के बारे में 15जुलाई 19को अतिक्रमण हटाने का आदेश हुआ किन्तु उसपर अमल नहीं किया गया.
याची अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के दो आदेश के बावजूद अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे. कोर्ट ने कहा जब कोर्ट अधिकारियो को अपना कर्तव्य निभाने का आदेश देती है तो कहते हैं कोर्ट सरकार चला रही.इसका यह जीता-जागता उदाहरण हैकि कोर्ट क्यों कदम उठाती है. सार्वजनिक गांव सभा की जमीन का अतिक्रमण किया गया है.
हाईकोर्ट ने दो बार याचिका निस्तारित कर इस उम्मीद के साथ निर्देश दिया कि अधिकारी अपना कर्तव्य निभायेंगे. अधिकारियों ने एक आदेश पारित किया किन्तु उसपर अमल नहीं किया गया.यह सब याची कह सकता है. प्रथमदृष्टया विपक्षी पावरफुल व्यक्ति लगता है,उसका अपना तरीका है.
-भारत एक्सप्रेस
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