जयपुर स्थित टाउन हॉल और होमगार्ड कार्यालय परिसर के कब्जे को लेकर पद्मिनी देवी, दीयाकुमारी, पद्मनाभ सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह में जवाब मांगा है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अवकाशकालीन बेंच ने यह आदेश दिया है.
कोर्ट ने राज्य सरकार को कोई कदम नहीं उठाने को कहा
कोर्ट ने अगली सुनवाई तक राज्य सरकार को कोई कदम नहीं उठाने को कहा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अनुच्छेद 363 और अनुच्छेद 366 का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार इसमें पक्षकार नहीं थी. जिसपर जस्टिस संजय मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार न होने पर, आपने यूओआई के साथ विलय कैसे किया? सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट से आग्रह किया कि जब तक राजस्थान सरकार इस मामले में अपना जवाब दाखिल नही कर देती है. तब तक अंतरिम रोक कोर्ट न लगाए.
हाई कोर्ट ने इन लोगों की अपील को किया था खारिज
बता दें कि राजस्थान हाई कोर्ट ने इन लोगों की अपील को खारिज कर दिया था. जिसके बाद टाउन हॉल परिसर में म्यूजियम के निर्माण का रास्ता साफ हो गया था. इस मामले में राजस्थान सरकार का कहना है कि संविधान के अंतर्गत समझौते (कोवेनेंट) के अनुसार यह संपत्ति राज्य सरकार की हैं. इसे लौटाया नहीं जा सकता है. जबकि याचिकाकर्ता की मांग है कि कोर्ट राज्य सरकार को आदेश दे कि इस जमीन पर कोई नया निर्माण ना करें.
कोर्ट ने अपने फैसले में कही ये बात
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ये सम्पत्तियां वर्ष 1949 में जयपुर रियासत और भारत सरकार के बीच हुए समझौते का हिस्सा है, जिनका उपयोग सरकारी प्रयोजन के लिए किया जाना था और इस संदर्भ में कोई सिविल विवाद संविधान के अनुच्छेद 363 के तहत न्यायालय की समीक्षा से बाहर है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी साफ कर दिया है कि संविधान के अंतर्गत कोवेनेंट में किए गए समझौते या संधि से उत्पन्न विवाद को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
राज्य सरकार को इनका उपयोग केवल सरकारी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूर्व राजपरिवार इनका पुनः अधिकार या मुआवजा मांग सकता है. इन चारों सम्पत्तियों की कीमत लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये के आसपास है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

