नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कबूतरों को दाना खिलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली सरकार, पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और एनडीएमसी को नोटिस भेजा है. यह याचिका एक स्कूली छात्र द्वारा दाखिल की गई थी. मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी.
बीट से फैल रहा प्रदूषण और बीमारी
NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि कबूतरों की संख्या बढ़ने से उनकी बीट सड़कों, फुटपाथों और ट्रैफिक आइलैंड पर जमा हो रही है. जब इन जगहों की सफाई होती है तो सूखी बीट हवा में उड़ती है, जिससे वायु प्रदूषण होता है और यह लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है.
कबूतरों की बीट में खतरनाक बैक्टीरिया
याचिका में कहा गया है कि एक कबूतर साल भर में लगभग 12 से 15 किलो बीट करता है. दिल्ली में अनुमानित 25 लाख कबूतर मौजूद हैं. वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया है कि इनकी बीट में खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं, जो फूड प्वाइजनिंग का कारण बन सकते हैं.
फेफड़ों की गंभीर बीमारी का खतरा
बीट के सूक्ष्म कण जब हवा में मिलते हैं तो लोगों के संपर्क में आने पर फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. याचिकाकर्ता ने खासतौर से ‘हाइपरसेंसिटिविटी न्युमोनाइटिस’ बीमारी का जिक्र किया, जिसमें फेफड़ों में सूजन हो जाती है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है.
प्रशासनिक विफलता पर सवाल
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न तो कबूतरों की संख्या पर रोक लगाना है और न ही दाना डालने वालों से विरोध है. उनकी आपत्ति सरकारी एजेंसियों से है, जो सार्वजनिक स्थलों पर अनाज बेचने वाले अस्थायी विक्रेताओं को हटाने में विफल रही हैं.
तत्काल कार्रवाई की मांग
याचिका में मांग की गई है कि एमसीडी, एनडीएमसी और पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया जाए कि वे फौरन ऐसे अनधिकृत विक्रेताओं को हटाएं जो सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों के लिए अनाज बेचते हैं और प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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