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सुप्रीम कोर्ट से नागालैंड के पूर्व जिला जज इनेलो झिमोमी को राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

नागालैंड के पूर्व जिला जज इनेलो झिमोमी को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत दी है. उन्होंने नकद सुरक्षा राशि में प्रशासनिक खामियों को उजागर करने पर साजिशन सेवानिवृत्त करने का आरोप लगाया है.

सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने नागालैंड के सेवानिवृत्त जिला जज इनेलो झिमोमी को फिलहाल राहत दे दिया है. कोर्ट ने झिमोमी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के बाद इन्हें अग्रिम जमानत प्रदान किया है.

उन्होंने दावा किया है कि मोन के प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अदालतों में नकद सुरक्षा राशि की प्रणाली में प्रशासनिक खामियों को उजागर करने के अनुचित तरीके से निशाना बनाया गया और सेवानिवृत्त होने के लिए मजबूर किया गया.

प्रशासनिक खामियों को उजागर करने का दावा

झिमोमी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि जब यह कोहिमा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट थे, तो उन्होंने इसी मुद्दे को उठाने के लिए सितंबर 2013 में गुवाहाटी हाई कोर्ट को पत्र लिखा था. साथ ही दायर याचिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने अपनी जबरन.सेवानिवृत्ति को अवैध बताया है.

साथ ही याचिका में इसे असंवैधानिक बताया गया है. याचिकाकर्ता ने नागालैंड की जिला न्यायपालिका में जमानत बांड की राशि या नकद सुरक्षा राशि को संबंधित जिला कोषागार में जमा नहीं किया जाता है. अब याचिकाकर्ता पर ही मों जिले में प्रधान एवं जिला जज के कार्यकाल के दौरान जमानत के लिए नकद सुरक्षा के रूप में ली गई 14.35 लाख रुपये की राशि के गबन का आरोप लगाया गया है. जब वे मोन जिले में प्रिंसिपल एंड जिला जज के रूप में कार्यरत थे.

मौजूदा प्रिंसिपल एंड जिला जज ने इनालो झिमोमी और दो अन्य के खिलाफ नकद गबन की शिकायत दर्ज कराई है. जिसके बाद नागालैंड सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया था. जिसको झिमोमी ने इस आदेश को गुवाहाटी हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से उन्हें अंतरिम राहत नहीं मिली थी. जिसके खिलाफ झिमोमी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर रखी है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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