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C Sadanandan Master: केरल के वो समाजसेवी-शिक्षाविद, जिनके दोनों पैर वामपंथियों ने निर्ममता से काट दिए थे, अब जाएंगे राज्‍यसभा

वरिष्ठ समाजसेवी और शिक्षाविद सी. सदानंदन मास्टर, जिनके दोनों पैर वामपंथी गुंडों ने काट दिए थे, वे अब राज्यसभा के लिए नॉमिनेट हुए हैं. उनके साहस और सेवा की कहानी प्रेरणादायक है. उनके बारे में जानिए.

Sadanandan Master

RSS के स्वयंसेवक रहे सदानंदन मास्टर, जिन्‍होंने वामपंथी गुंडों की हिंसा झेली. अब राज्‍यसभा भेजे गए.

Rajya Sabha Member C Sadanandan Master: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 सदस्यों को नॉमिनेट किया है, इनमें केरल के वरिष्ठ समाजसेवी और शिक्षाविद सी. सदानंदन मास्टर भी शामिल हैं. उनके अलावा पूर्व सरकारी वकील और लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार रहे उज्ज्वल निकम, इतिहासकार एवं शिक्षाविद मीनाक्षी जैन और भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला भी राज्यसभा जाएंगे.

शिक्षाविद सी. सदानंदन मास्टर ​61 साल के हैं. वे केरल के कन्नूर में जन्मे. पेशे से वे शिक्षाविद और राजनेता रहे हैं. उन्‍होंने ग्रामीण शिक्षा, आदिवासी विकास और सामाजिक समरसता पर काम किया है. उनका केरल के पश्चिम इलाकों में शिक्षा के प्रसार के लिए सक्रिय योगदान रहा.

केरल में वे विभिन्न सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े रहे. राजनैतिक कैरियर की बात करें तो सी. सदानंदन मास्टर केरल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक भी रहे हैं. 2016 और 2021 में उन्‍होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा था.

X.com पर पीएम मोदी ने दी बधाई

राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किए जाने पर सदानंदन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बधाई दी. उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा. “सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे न झुकने की प्रतिमूर्ति है. हिंसा और धमकी भी राष्ट्र विकास के प्रति उनके जज्बे को डिगा नहीं सकी.” उन्होंने आगे लिखा, “एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं. युवा सशक्तिकरण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता है. राष्ट्रपति जी द्वारा राज्यसभा के लिए नॉमिनेट होने पर उन्हें बधाई. सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएँ.”

1994 की भयावह घटना, जब काट दिए गए पैर

कहा जाता है कि पहले सदानंदन मास्टर का पूरा परिवार ही कम्युनिस्टों का था. उनके पिता और भाई सक्रिय वामपंथी कार्यकर्ता थे. हालांकि, 1994 में एक ऐसी भयावह घटना घटी, जब सदानंदन को अपने दोनों पैर खोने पड़े. सदानंदन जब 30 साल के थे, तो वह पेरिनचरी, मट्टनूर नगर पालिका में सरकार-एडेड कुजिक्कल लोअर प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षक थे. 25 जनवरी, 1994 को वह अपनी बहन की शादी की व्यवस्था पर बात करने के बाद शाम को अपने चाचा के घर से लौट रहे थे. बस से उतरने पर कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया. वे लोग CPI(M) के गुंडे थे. जिन्होंने सदानंदन के दोनों पैरों को बीच सड़क पर काट दिया.

सी. सदानंदन मास्टर को आज उस राज्‍यसभा सीट के लिए नॉमिनेट किया गया है, जो पहले के नामित सदस्यों के सेवानिवृत्त होने से खाली हुई थी.

राज्यसभा नॉमिनेशन को लेकर गृह मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन.

12 सदस्यों को नॉमिनेट कर सकती हैं राष्ट्रपति

सी. सदानंदन मास्टर को राज्‍यसभा सांसद के रूप में नॉमिनेट करने का अधिकार राष्ट्रपति को ही है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत, राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार है. ये सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान, सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के लिए चुने जाते हैं.

यानी, राज्यसभा में 12 सदस्य ऐसे होते हैं जिन्हें जनता नहीं चुनती, बल्कि राष्ट्रपति नॉमिनेट करती हैं. ये नाम सरकार राष्ट्रपति को सुझाती है और फिर राष्ट्रपति उन्हें नॉमिनेट करती हैं. इनका उद्देश्‍य यह होता है कि संसद में हर क्षेत्र के जानकार लोग मौजूद हों, ताकि कानून बनाने में उनका अनुभव और उनकी राय काम आए.

फिलहाल देश में राज्यसभा के कुल 245 सदस्य

देश में वर्तमान में राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, जिसमें 233 निर्वाचित और 12 नामांकित सदस्य शामिल हैं. सबसे ज्‍यादा राज्यसभा सांसद अभी सत्‍तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास हैं, और सबसे ज्‍यादा राज्‍यों में भी भाजपा की ही सरकार है.

यह भी पढ़िए: पीएम मोदी ने राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए जाने पर हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल निकम, सी. सदानंदन मास्टर और डॉ. मीनाक्षी जैन को दीं शुभकामनाएं



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