सुप्रीम कोर्ट से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसालिमीन (AIMIM) को फिलहाल राहत मिल गई है. एआईएमआईएम को एक राजनीतिक दल के रूप में चुनाव आयोग द्वारा दिए गए पंजीकरण को रद्द करने की मांग वाली याचिका को याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सलाह के बाद वापस ले लिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नए सिरे से याचिका दायर करने को सलाह दी है.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने दिया आदेश
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई प्रत्याशी धार्मिक आधार पर वोट मांगता है तो उसे चुनौती दी जा सकती है. यह याचिका तिरुपति नरशिमा मुरारी की ओर से दायर की गई थी, और दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी का संविधान भारत के संविधान के खिलाफ नहीं है, यह तर्क कि एआईएमआईएम किसी विशेष समुदाय के हित में काम करना चाहती है, खारिज किया जाता है.
पुरानी धार्मिक ग्रंथों की किसी भी शिक्षा में कोई बुराई नहीं-कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुरानी धार्मिक ग्रंथों की किसी भी शिक्षा में कोई बुराई नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इस पार्टी का गठन और संविधान धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है. धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगे जा सकते. जिसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा की समाज के हर पिछड़े वर्ग के लिए हैं, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पार्टी का संविधान यही कहता है.
संविधान में अल्पसंख्यकों को अधिकारों की दी गई गारंटी
कोर्ट ने कहा कि संविधान में अल्पसंख्यकों को कुछ अधिकारों की गारंटी दी गई है. पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया है कि वह उन अधिकारों की रक्षा के लिए काम करेगी. याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि इसमें यह भी कहा गया है कि वह उन अधिकारों की रक्षा के लिए काम करेगी. जैन ने कहा कि इसमें यह भी कहा गया है कि वह मुसलमानों में इस्लामी शिक्षा को बढ़ावा देगी. एक राजनीतिक दल, जो भविष्य में सत्ता में आएगा.
कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव आयोग वेदों या किसी भी चीज की शिक्षा पर आपत्ति जताता है, तो कृपया उचित मंच पर जाए. कानून उसका ध्यान रखेगा. जैन ने कहा कि अभिराम सिंह मामले में सख्त आदेश था कि कोई भी राजनीतिक दल धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगेगा. इसका उल्लंघन हो रहा है नाम ही एक खास समुदाय के लिए है. कोर्ट ने कहा कि जब कोई उम्मीदवार वोट पाने के लिए धार्मिक भावनाओं का सहारा लेता है, तो आप चुनावी मामले में अभिराम सिंह पर भरोसा करेंगे. 16 जनवरी 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
-भारत एक्सप्रेस
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