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Sawan 2025: पूर्वांचल के स्विट्जरलैंड स्थित Shivdwar temple की दुर्लभ मूर्ति में है पूरा शिव परिवार

Shivdwar temple में शिव पार्वती और उनके परिवार की काफी काफी दुर्लभ मूर्ति है. इसमें भगवान शिव माता पार्वती और गणेश और कार्तिकेय विराजमान

Shivdwar temple

Shivdwar temple, Sonbhadra

Sawan 2025: सावन के महीने में सोनभद्र जनपद के शिव मंदिर (Shivdwar temple) में शिव भक्तों, कांवड़ियों की भीड़ दर्शन पूजन के लिए आ रही है.  इस मंदिर में भगवान शिव पार्वती और उनके परिवार की दुर्लभ मूर्ति है. इस प्रतिमा में भगवान शिव नंदी पर बैठे हुए हैं और माता पार्वती उनकी जंघा पर बैठी हुई हैं. मूर्ति के नीचे वाले हिस्से में भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं. यह 3 फीट की मूर्ति 11वीं सदी की है और इसकी वास्तुकला प्राचीन काल काल के अनूठे शिल्प कौशल को दर्शा रही है.

Shivdwar temple कहां स्थित है

सोनभद्र के राबर्ट्सगंज से 40 किलोमीटर दूर शिवद्वार मंदिर (Shivdwar temple) है और यह घोरावल से 9 किलोमीटर है. सोनभद्र की सीमाएं मध्यप्रदेश से सटी हुई हैं. सोनभद्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य छठा के लिए जाना जाता है.  Shivdwar temple शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है. शिवद्वार मंदिर में भगवान शिव परिवार से रूबरू होकर भक्तों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है.

कैसे मिली Shivdwar temple की दुर्लभ मूर्ति

कहते हैं वर्ष 1937 में घोरावल क्षेत्र के सतद्वारी गांव में महतो नामक किसान खेत में हल चला रहा था. अचानक उसका हल किसी पत्थर से टकराया. उसने खेत की जुताई बंद कर पत्थर हटाने के लिए मिट्टी निकालनी शुरू की. मिट्टी निकलते ही उसके सामने काले रंग की 3 फीट बड़ी शिव पार्वती की प्रतिमा निकल आई. वह इसे देखकर अचंभित हो गया. गांव के काफी लोग मूर्ति को देखने के लिए एकत्र हो गए. खेत से इस तरह मूर्ति निकलने की बात सभी जगह फैल गई. वर्ष1938 में गांव के जमीदार परिवार ने शिवद्वार मंदिर (Shivdwar temple) का निर्माण कराया.कालांतर में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वतिन मंदिर सौंदर्यीकरण कराया.

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प्रसिद्ध शिवद्वार धाम में वर्ष 1986 से शुरू हुई कांवड़ यात्रा

वर्ष 1986 में घोरावल के रहने वाले 13 कांवड़िए मिर्जापुर जनपद स्थित बरियाघाट से कांवड़ में गंगाजल भरकर शिवद्वार धाम पहुंचे और भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक किया. इससे पूर्व यहां कांवड़िए नहीं आते थे लेकिन आज लाखों कांवड़िए यहां बंब बंब भोले के नारे के साथ आ रहे हैं. यह मंदिर कांवड़ियों की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन गया है और पूरे पूर्वांचल से शिवभक्त कांवड़ लेकर आ रहे हैं.

शिवद्वार मंदिर के पास है प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मुक्खा फॉल

Shivdwar temple के पास ही बेलन नदी पर स्थित मुक्खा फॉल 100 मीटर से नीचे गिरता है. जिसको देखने से एक ऐसे आनंद की अनुभूति होती है जिसे व्यक्त कर पाना मुश्किल है. 100 मीटर ऊंचाई से गिरने के कारण पानी की फुहार दूर दूर तक जाती है और यह पर्यटकों से स्पर्श करती है. यह दृश्य काफी मनमोहक। होता है. यहां प्राकृतिक छठा को देखकर सभी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. यहां आने वाले पर्यटक कभी कभी फॉल के काफी नजदीक चले जाते हैं जिससे अक्सर अप्रिय दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं.

मुक्खा फॉल के कुंड में है काफी संख्या में मगरमच्छ

मुक्खा फॉल 100 मीटर नीचे गिरने के बाद एक कुंड के रूप में परिवर्तित हो जाता हैं जहां काफी संख्या में मगरमच्छ भी पाए जाते हैं. इस फॉल के पास औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के वृक्ष काफी संख्या में हैं. फॉल के पास ही कुछ खंडहर नुमा गुफा भी हैं जहां प्राचीन काल में मानवों द्वारा बनाए गए लखनिया चित्र भी मिलते हैं. इस तरह यह फॉल पहाड़ियों के बीच आकर्षण का केंद्र है और ऐतिहासिक महत्त्व भी रखता है.

Shivdwar temple आएं तो जरूर देखें 160 करोड़ वर्ष पुराने फ़ॉसिल्स

सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज से 9 किलोमीटर दूर सलखन स्थित फ़ॉसिल्स पार्क विश्व प्रसिद्ध है. कुदरत के नायाब तोहफे सलखन फ़ॉसिल्स पार्क में 160 करोड़ वर्ष पुराने फ़ॉसिल्स हैं जो 25 एकड़ में फैले हुए हैं. भू वैज्ञानिकों को इसके अध्ययन से पृथ्वी में हुए बदलाव और उसके तमाम रहस्यों की जानकारी मिल जाती है. इस जानकारी का लाभ भविष्य के लिए भी काफी उपयोगी हैं.

सलखन पार्क अमेरिका के येलो स्टोन फ़ॉसिल्स पार्क से है पुराना

सलखन फ़ॉसिल्स पार्क अमेरिका के प्रसिद्ध येलो येलो स्टोन फ़ॉसिल्स पार्क से बड़ा और पुराना है. सलखन फ़ॉसिल्स पार्क देश की बड़ी धरोहर है लेकिन सुविधाओं के अभाव में यहां पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे कम लोगों को ही इसकी जानकारी है. यूपी के पर्यटन विभाग के महानिदेशक मुकेश मेश्राम ने बताया कि सलखन पार्क को जल्दी सुविधाओं से युक्त कर दिया जाएगा, इसके पास होटल बनाने, सौंदर्यीकरण की परियोजना बन रही है.

रॉबर्ट्सगंज से 30 किलो मीटर की दूरी पर है चंद्रकांता का विजय गढ़ किला

चंद्रकांता और युवराज की प्रेम कहानी का प्रतीक बन चुका विजय गढ़ किला तिलिस्मी किले के रूप में जाना जाता है. टी वी सीरियल चंद्रकांता में इस किले के तमाम रहस्यों को उजागर किया गया था जिसके कारण यह चंद्रकांता का किले के रूप में प्रचलित हो गया. विजय गढ़ किले की खासियत है कि गुफा के रास्ते से नौगढ़ और चुनारगढ़ के लिए रास्ता बना हुआ है लेकिन अब यह बंद पड़ा हुआ है. किले में सात तालाब और कई गुफाएं है . कहा जाता है कि इस किले में काफी खजाना छिपा हुआ है. यह किला अपने समय का काफी समृद्धिशाली किला था.

सोनभद्र को पूर्वांचल का स्विट्जलैंड भी कहा जाता हैं. यहां शिवद्वार मंदिर (Shivdwar temple), कई बड़े जलप्रपात, ऐतिहासिक विजयगढ़ का किला, चारो ओर हरियाली छठा, जंगलों से भरपूर पहाड़ी रास्ते पर्यटकों का मन मोह लेते हैं.

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