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सावन विशेष: ‘लिंगम के राजा’ का मंदिर, जहां एक साथ पूजे जाते हैं ‘हर’ और ‘हरि’

सावन में भक्ति से सराबोर भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर हर-हर महादेव की गूंज से जीवंत हो उठा है. कलिंग शैली में बना यह मंदिर पौराणिक कथाओं, चंदन यात्रा और महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है.

लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर

सावन का पावन माह चल रहा है. शिवालयों में भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं तो चहुंओर ‘हर हर महादेव’ की गूंज है. ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित ‘लिंगम के राजा’का लिंगराज मंदिर स्थित है, जहां भक्त भक्ति भाव से पहुंचते हैं और ‘हर’ के साथ ‘हरि’ का दर्शन करते हैं.

एकता का अद्भुत केंद्र

लिंगराज यह मंदिर भगवान शिव (हर) और भगवान विष्णु (हरि) के एक स्वरूप हरिहर को समर्पित है, जो शैव और वैष्णव संप्रदायों के मिलन का भी प्रतीक है. 11वीं शताब्दी में सोमवंशी राजा जजाति केशरी ने मंदिर का निर्माण कराया था. यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग का व्यास 8 फुट और ऊंचाई 8 इंच है. कलिंग स्थापत्य शैली में बना यह मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और विशाल मीनार के लिए भी विख्यात है. प्रांगण में स्थित अन्य छोटे मंदिरों से सुसज्जित इस परिसर की भव्यता दूर से ही मन मोह लेती है.

गैर-हिंदुओं का मंदिर में प्रवेश निषेध है. उनके लिए मंदिर परिसर के बाहर एक मंच बनाया गया है, जहां से वे इसकी भव्यता का दर्शन कर

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लिंगराज मंदिर का उल्लेख ब्रह्म पुराण में मिलता है. एक कथा के मुताबिक, देवी पार्वती ने यहीं ‘लिट्टी’ और ‘वसा’ नामक राक्षसों का वध किया था. संग्राम के बाद माता पार्वती को प्यास लगी थी, जिसके लिए भगवान शिव ने बिंदुसागर सरोवर बनाया, जिसमें सभी पवित्र नदियों का जल समाहित है. यह सरोवर मंदिर के उत्तर में है और चंदन यात्रा जैसे उत्सवों का केंद्र है.

 शिव की तपोभूमि का केंद्र

लिंगराज मंदिर में महाशिवरात्रि, अशोकाष्टमी और चंदन यात्रा जैसे त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं. महाशिवरात्रि के साथ ही सावन समेत अन्य धार्मिक अवसरों पर भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं. उपवास रखकर भगवान शिव को प्रसाद चढ़ाते हैं और रात में महादीप जलाकर उपवास तोड़ते हैं. चंदन यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू होने वाला 21 दिवसीय उत्सव है, जिसमें भगवान की मूर्तियों को बिंदुसागर सरोवर में चंदन और जल से स्नान कराया जाता है.

अशोकाष्टमी पर भगवान लिंगराज की रथयात्रा निकलती है, जिसमें उनकी मूर्ति को रामेश्वर मंदिर ले जाया जाता है. मंदिर के पास बिंदुसागर सरोवर और एकाम्र वन उद्यान भी दर्शनीय हैं. एकाम्र वन में औषधीय गुणों वाले पौधे और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े वृक्ष इसे खास बनाते हैं. पर्यटक मुक्तेश्वर, राजरानी, अनंत वासुदेव और परशुरामेश्वर जैसे नजदीकी मंदिरों की मनमोहक वास्तुकला का भी आनंद ले सकते हैं.


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भारत एक्सप्रेस



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