IRCTC Tender Scam मामले राऊज एवेन्यु कोर्ट ने आरोप तय करने को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 5 अगस्त को फैसला सुनाएगा. स्पेशल सीबीआई जज विशाल गोगने की अदालत ने आरोप तय करने को लेकर दोनों पक्षों की जिरह के बाद 29 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था.
मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी और कहा था कि यह मुकदमा राजीनीति से प्रेरित है. इस मुकदमे से.संबंधित सीबीआई के पास कोई ठोस सबूत मौजूद नही है.जबकि सीबीआई का दावा है कि उसके पास इस मुकदमे से संबंधित ठोस सबूत मौजूद है. जो दर्शाता है कि वर्ष 2004-2014 के बीच रेलमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने इस घोटाले की साजिश रची थी.
इस मामले में लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेम चंद्र गुप्ता और सरल गुप्ता आरोपी है. यह मामला आईआरसीटीसी के दो होटलों को चलाने का ठेका एक निजी फर्म को देने में कथित अनियमितता से संबंधित है.
रेलवे टेंडर घोटाले में CBI का आरोप, लालू परिवार को बेनामी जमीन सौंपने की साजिश
गौरतलब है कि साल 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे के पूरी और रांची स्थित बीएनआर होटल के रखरखाव आदि के लिए आईआरसीटीसी को स्थानांतरित किया था. सीबीआई के मुताबिक नियमो को ताक पर रख कर रेलवे का यह टेंडर विनय कोचर को कंपनी मेसर्स सुजाता होटल्स को दिया गया था.
इतना ही नही सीबीआई का यह भी आरोप है कि टेंडर दिये जाने के बदले 25 फरवरी 2005 को कोचर बंधुओ ने पटना के बेली रोड स्थित तीन एकड़ जमीन सरल गुप्ता की कंपनी मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड को बेच दी, जबकि मार्किट में उसकी कीमत कही ज्यादा थी.
इस जमीन को खेती की जमीन बताकर सर्कल रेट से काफी कम पर बेच कर स्टांप ड्यूटी में गड़बड़ी की गई. बाद में 2010 से 2014 के बीच यह बेनामी संपत्ति लालू प्रसाद यादव की परिवार की कंपनी लारा प्रोजेक्ट को सिर्फ 65 लाख रुपये में ही दे दी गई, जबकि उस समय उसकी बाजार में कीमत 94 करोड़ रुपये के आसपास थी.
-भारत एक्सप्रेस
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