पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे में उप-श्रेणियां जोड़ने के फैसले को लेकर दायर पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) 28 जुलाई को सुनवाई करेगा. सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जल्द सुनवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि इसको लेकर एक अवमानना याचिका भी दायर किया गया है.
सिब्बल ने क्या कहा?
सिब्बल ने कहा कि एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि हमें कानून बनाना होगा, जबकि यह सभी न्यायिक फैसलों के विपरीत है. इसपर सीजेआई ने कहा कि इंदिरा साहनी केस में कहा गया है कि कार्यपालिका ओबीसी की पहचान कर सकती है, यह तो पहले ही तय हो चुका है. राज्य सरकार ने यह नई सूची मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा ओबीसी सूची में 77 समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द करने के बाद तैयार किया था.
राज्य सरकार की ओर से इसको लेकर पहले दी गई चुनौती
हालांकि राज्य सरकार की ओर से इसको लेकर पहले चुनौती दी गई, जिसपर सुप्रीम कोर्ट दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया था कि राज्य ओबीसी की पहचान के लिए नई लिस्ट तैयार करने जा रही है. बता दें कि हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पिछली 113 श्रेणियों वाली लिस्ट को बदलकर 140 उप-श्रेणियों वाली लाई गई नई लिस्ट पर अंतरिम रोक लगा रखा है. जिसके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से याचिका दायर की गई है.
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ओबीसी-ए और ओबीसी-बी सूची में 76 नई श्रेणियों को किया गया था शामिल
10 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में संशोधित ओबीसी-ए और ओबीसी-बी सूची पेश की थी. जिसमें 76 नई श्रेणियों को शामिल किया गया था, इस प्रकार कुल संख्या 140 हो गई. इसमें 80 मुस्लिम और 60 गैर-मुस्लिमों को रखा गया है. राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दिया. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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