Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

Anil Ambani से जुड़ी 50 कंपनियों पर ED की रेड, 25 चेहरों से पूछताछ; ‘टीम अनिल अंबानी’ में आखिर कौन-कौन हैं शामिल? क्या-कुछ मिला?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के RAAGA से जुड़े 35 ठिकानों पर छापेमारी की. कुल ₹3,000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगा है. जांच में मनी लॉन्ड्रिंग और कई अनियमितताएं उजागर होने की संभावना है.

ed-action-against-anil-ambani news

अनिल अंबानी से जुड़े कारोबारियों पर ED का शिकंजा

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

ED Raids: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज एक बड़े सर्च ऑपरेशन के तहत उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil ambani ED Raid) के रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (RAAGA) से जुड़े 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई ₹3,000 करोड़ के कथित यस बैंक लोन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई. मुंबई और दिल्ली में फैली इस व्यापक कार्रवाई में 50 कंपनियों और 25 व्यक्तियों को निशाना बनाया गया, जिसमें अंबानी के व्यापारिक साम्राज्य से जुड़े 18 शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.

यह छापेमारी भारत के सबसे प्रमुख व्यापारिक समूहों में से एक पर छाए वित्तीय अनियमितताओं के बादल के बीच एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है.

ईडी की जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही है और यह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा 19 सितंबर 2022 को दर्ज दो प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) पर आधारित है. ये FIR यस बैंक द्वारा रिलायंस ग्रुप की कंपनियों, विशेष रूप से रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) को दिए गए लोन से संबंधित हैं. सेबी, नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे नियामक निकायों से मिले अतिरिक्त इनपुट ने ईडी के मामले को मजबूत किया है, जिससे फाइनेंशियल मिसकंडक्ट का जटिल जाल उजागर हुआ है.

enforcement directorate

आरोप: ₹3,000 करोड़ के लोन डायवर्जन का खेल

ईडी के सूत्रों के अनुसार, जांच का केंद्र 2017 से 2019 के बीच यस बैंक द्वारा RAAGA की कंपनियों को दिए गए लगभग ₹3,000 करोड़ के लोन का कथित अवैध डायवर्जन है. प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चलता है कि बैंकों, शेयरधारकों, निवेशकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को धोखा देकर सार्वजनिक धन की हेराफेरी करने की एक सुनियोजित योजना थी. जांच का एक प्रमुख पहलू “रिश्वत के बदले लोन” का कथित गठजोड़ है, जिसमें यस बैंक के तत्कालीन चेयरमैन राणा कपूर ने अपनी निजी कंपनियों में भुगतान प्राप्त करने के बाद अंबानी की ग्रुप कंपनियों को बड़े, असुरक्षित लोन स्वीकृत किए.

ईडी ने लोन स्वीकृति प्रक्रिया में कई अनियमितताएं पकड़ी हैं, जिनमें शामिल हैं:

– बैकडेटेड क्रेडिट अप्रूवल मेमोरेंडम (CAM): प्रमुख दस्तावेजों में हेरफेर कर मानक प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया.
– उचित जांच का अभाव: लोन बिना उचित क्रेडिट विश्लेषण या यस बैंक की आंतरिक क्रेडिट नीतियों के पालन के स्वीकृत किए गए.
– शेल कंपनियों में Funds Diversion : धन को समूह से जुड़ी इकाइयों और कमजोर वित्तीय स्थिति वाली शेल कंपनियों में भेजा गया, जिनके निदेशक और पते एक जैसे थे.
– लोन एवरग्रीनिंग: पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन जारी किए गए, जिससे डिफॉल्ट छिपाए गए और जोखिम बढ़ा.
– वित्तीय विवरणों में गलत बयानी: उधारकर्ताओं ने कथित तौर पर लोन प्राप्त करने के लिए गलत वित्तीय विवरण प्रस्तुत किए.

RHFL के कॉर्पोरेट लोन पोर्टफोलियो में वित्तीय वर्ष 2017-18 में ₹3,742.60 करोड़ से वित्तीय वर्ष 2018-19 में ₹8,670.80 करोड़ की भारी उछाल भी जांच के दायरे में है. सेबी ने इस तेज वृद्धि में गंभीर शासन और अनुपालन संबंधी समस्याओं को चिह्नित किया है. ईडी यह जांच कर रहा है कि क्या यह वृद्धि फंड डायवर्जन की रणनीति का हिस्सा थी.

Anil Ambani

टीम अनिल अंबानी में ये शामिल

ईडी की छापेमारी में 18 शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया गया, जिन्हें अंबानी के व्यापारिक कार्यों में प्रमुख खिलाड़ी माना जाता है. संवाद सूत्रों के अनुसार, इन व्यक्तियों में शामिल हैं:

1. संजय डांगी
2. सतीश सेठ
3. अमिताभ झुनझुनवाला
4. अमित डांगी
5. पुनीत गर्ग
6. छाया विरानी
7. आकाश सूरी
8. जितेंद्र सांघवी
9. अमित बपना
10. पिंकेश शाह
11. रविंद्र सुधाकर
12. अनुराग शर्मा
13. हसीत शुक्ला
14. कमलकांत गुप्ता
15. वरुण अग्रवाल
16. अमरीश शाह
17. संदीप खोसला यशपाल
18. प्रदीप श्रॉफ


इन अधिकारियों की भूमिका और उनके द्वारा संचालित कंपनियों की गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है. ईडी ने कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनका विश्लेषण करके यह पता लगाया जाएगा कि क्या ये व्यक्ति लोन डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग की योजना में सक्रिय रूप से शामिल थे.

छापेमारी में क्या-कुछ मिला?

मुंबई और दिल्ली में रिलायंस ग्रुप के कार्यालयों, आवासीय परिसरों और सहायक कंपनियों पर की गई छापेमारी में ईडी ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं. इनमें वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, ईमेल, और कंपनी के आंतरिक दस्तावेज शामिल हैं, जो कथित धन शोधन के तरीकों को उजागर कर सकते हैं. कुछ ठिकानों से जब्त किए गए डिजिटल डेटा में शेल कंपनियों के साथ लेनदेन और संदिग्ध फंड ट्रांसफर की जानकारी सामने आई है.

सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने उन कंपनियों पर विशेष ध्यान दिया, जिनके पास कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां नहीं थीं, फिर भी उन्हें बड़े पैमाने पर लोन दिए गए. इनमें से कई कंपनियां रिलायंस ग्रुप से जुड़े निदेशकों या उनके करीबी सहयोगियों द्वारा संचालित थीं.

आगे और क्या हो सकता है?

ईडी की यह कार्रवाई अनिल अंबानी के व्यापारिक साम्राज्य के लिए एक बड़ा झटका है, जो पहले से ही वित्तीय संकट और कानूनी उलझनों से जूझ रहा है. जांच एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों और डेटा का गहन विश्लेषण कर रही है, ताकि धन शोधन के पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके. यह भी संभावना है कि आने वाले दिनों में और छापेमारियां हो सकती हैं, क्योंकि ईडी अन्य संदिग्ध कंपनियों और व्यक्तियों की जांच को गहरा कर रही है.

ईडी की यह छापेमारी भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो वित्तीय पारदर्शिता और कॉर्पोरेट शासन की आवश्यकता को रेखांकित करती है. अनिल अंबानी और उनकी टीम पर कसता शिकंजा न केवल रिलायंस ग्रुप के लिए बल्कि पूरे कॉर्पोरेट जगत के लिए एक चेतावनी है कि वित्तीय अनियमितताओं पर नियामक एजेंसियां कड़ी नजर रख रही हैं. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है.

यह भी पढ़िए: ED का बड़ा एक्शन — प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी ग्रुप के 35 ठिकानों पर मारा छापा, 3000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital