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महिला कैदियों के लिए नरक से कम नहीं है इन देशों की जेल, हालात जानकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे

ईरान, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब जैसे देशों की जेलों में महिला कैदियों को अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं. जानिए दुनिया की जेलों में महिलाओं की स्थिति कैसी है और किन देशों में सुधार की जरूरत है.

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दुनिया की worst prisons में women कैदियों पर अत्याचार—ईरान, सऊदी अरब जैसी जेलों में छिनती है गरिमा और पहचान।

Horrible Condition of Women Prisoners: आज की दुनिया में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं, फिर चाहे वो राजनीति हो, विज्ञान, खेल या बिजनेस. लेकिन जेलों की दीवारों के पीछे आज भी महिलाओं के साथ होने वाला व्यवहार हमें झकझोर देता है. कई देशों में महिला कैदियों की स्थिति इतनी भयावह है कि उसे सुनकर रूह कांप जाती है. कहीं धार्मिक कट्टरता की वजह से तो कहीं सत्तावाद के चलते, इन महिलाओं से उनकी गरिमा, स्वास्थ्य और यहां तक कि पहचान तक छीन ली जाती है. आइए कुछ तस्वीरों के जरिए हम आपको इन देशों की जेलों में महिला कैदियों की स्थिति का कड़वा सच दिखाते हैं.

आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. चाहे नौकरी हो, राजनीति, खेल या बिजनेस. लेकिन जेलों की दुनिया में ये बराबरी अब भी अधूरी है. कुछ देशों में महिला कैदियों को जहां बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, वहीं कुछ जगहों पर उनकी हालत जानवरों से भी बदतर है.

ईरान में महिला कैदियों के साथ बेहद सख्त और अमानवीय व्यवहार किया जाता है. यहां महिलाओं को बिना किसी मुकदमे के सालों तक जेल में रखा जा सकता है. राजनीतिक विचार रखने या हिजाब न पहनने जैसी वजहें भी जेल जाने का कारण बन जाती हैं. जेलों में शारीरिक और मानसिक यातनाएं आम हैं.

उत्तर कोरिया की जेलें खासतौर पर बदनाम हैं. यहां महिलाओं से खदानों में जबरन काम करवाया जाता है. खाना बेहद कम मिलता है और पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं होता. कई बार प्रेग्नेंट महिलाओं तक को यातना दी जाती है. वहां इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं दिखाई देती.

सीरिया की जेलों में महिलाओं को गिरफ्तार करने के बाद उनकी पहचान तक छिपा दी जाती है. उन्हें उनके परिवार वालों से मिलने नहीं दिया जाता. जेल के भीतर शारीरिक और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप आम बात माने जाते हैं. ये कैद एक सजा नहीं, ताउम्र का अभिशाप बन जाती है.

सऊदी जेलों में महिलाओं को सख्त इस्लामी नियमों के तहत कैद किया जाता है. सामाजिक या धार्मिक कानूनों का उल्लंघन करने पर उन्हें बिना सुनवाई के जेल में डाल दिया जाता है. जेलों में ढंग का खाना, दवाइयां और साफ-सफाई का भी बेहद अभाव होता है. वहां का माहौल मानसिक रूप से तोड़ देने वाला होता है.

भारत में महिला कैदियों की संख्या पुरुषों की तुलना में कम है और उनके लिए अलग बैरक बनाए जाते हैं. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ रहने वाली कैदियों के लिए भी कुछ विशेष व्यवस्थाएं होती हैं. फिर भी छोटे शहरों की जेलों में भीड़, संसाधनों की कमी और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

दुनिया के कुछ विकसित देशों में महिला कैदियों को अच्छा खाना, साफ-सुथरे रहने का स्थान और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती हैं. वहां सुधार की भावना के साथ जेलें चलाई जाती हैं. लेकिन यह तस्वीर हर देश में नहीं दिखती. ज्यादातर विकासशील और तानाशाही वाले देशों में महिलाएं सबसे ज्यादा पीड़ित होती हैं.

कैद चाहे किसी सजा के तहत हो या किसी आरोप के, इंसानियत की गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए. महिला कैदियों के साथ हो रहे अन्याय को रोकना जरूरी है. दुनियाभर में जेल सुधारों की जरूरत है, ताकि हर महिला को, यहां तक की अपराधी को भी बुनियादी अधिकार और इज्जत के साथ जीने का हक मिल सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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