तमिलनाडु में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के विज्ञापनों में मुख्यमंत्री और राजनेताओं की तस्वीरें दिखाने से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. सीजेआई बीआर गवई और के विनोद चंद्रन की पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही है. मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई हैं.
मद्रास हाईकोर्ट का आदेश
मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कल्याणकारी योजनाओं में वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम व तस्वीरों के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया है. जिसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. कोर्ट याचिका पर 6 अगस्त को अगली सुनवाई करेगा.
AIADMK सांसद की जनहित याचिका
मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपने आदेश में स्पष्ट कर चुका है कि मुख्यमंत्री की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है. AIADMK सांसद सी. वे शनमुगम ने मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया था. जिनकी याचिका पर हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया था. हाई कोर्ट में दायर याचिका में उंगलुड़न स्टालिन नाम की योजना पर सवाल उठाया था और कहा था कि यह राजनीतिक प्रचार जैसा है.
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि यह रोक केवल नाम और प्रचार सामग्री पर लागू होगा. मद्रास हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि वह जीवित व्यक्तियों के नाम पर कोई नई या पुनः ब्रांडेड योजना न चलाए. इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि किसी योजना के प्रचार में पूर्व मुख्यमंत्रियों, वैचारिक नेताओं या द्रविड़ मुन्नेड कड़गम के प्रतीक, ध्वज या चिन्ह का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.
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