गौतम गंभीर
दिल्ली हाई कोर्ट ने कोविड 19 दवाओं के अवैध भंडारण और वितरण से संबंधित मामले में गौतम गंभीर की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. दायर याचिका में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और 9 अप्रैल को दिए गए उस आदेश को वापस लेने की मांग की थी, जिसमें निचली अदालत की कार्यवाही पर लगी रोक को हटा दिया गया था. इस मामले में गौतम गंभीर के अलावे उनकी माँ और पत्नी शामिल है.
पहचान और पद नहीं, सिर्फ कानून चलता है- कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान गौतम गंभीर की ओर से पेश वकील जय अनंत देहद राई ने कहा कि उनका मुवक्किल न सिर्फ भारतीय टीम का पूर्व कप्तान और सांसद रह चुका है, बल्कि कोविड 19 के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां बांटकर लोगों की मदद की थी, इसपर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आप बार-बार नाम और पहचान गिनवा रहें हैं, इसका असर अदालत पर नही पड़ेगा.
इरादा नेक हो सकता है, लेकिन तरीका गलत बताया गया
अदालत में नाम नहीं, सिर्फ दलीलें और कानून चलता है. पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने ड्रग कंट्रोलर से सवाल किया था कि क्या सभी सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों, जैसे गुरुद्वारों और मंदिरों के खिलाफ भी ऐसी कार्रवाई की जाएगी, जो महामारी के दौरान लोगों को मदद कर रहे थे. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी किया तह तक गौतम गंभीर का इरादा भले ही नेक रहा हो, लेकिन उनका तरीका कानून सही नही था.
बता दें कि औषधि नियंत्रण विभाग ने गौतम गंभीर फाउंडेशन, इसकी सीईओ अपराजिता सिंह, सीमा गंभीर, गौतम गंभीर और नताशा गंभीर के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स कानून की धारा 18 (सी) के साथ धारा 27 (बी) (दो) के तहत मामला दर्ज किया था.
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