सुप्रीम कोर्ट ने रामसेतु को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है.दायर याचिका में कहा गया है कि रामसेतु का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है. सरकार को इसपर जल्द फैसला लेना चाहिए.
स्वामी ने याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे दी वह राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक और राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग पर वाली याचिका पर जल्द फैसला ले.
रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग
सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार राम सेतु को किसी भी तरह के दुरुपयोग, प्रदूषण या अपवित्रता से बचाने के लिए बाध्य है. स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि कोर्ट के 2023 के आदेश के अनुसार उन्होंने रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर अर्जी दी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक कोई फैसला नही लिया है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि वह राम सेतु को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया में है और सरकार इस पर विचार कर रही है. जिसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी को निर्देश दिया था कि वह इससे जुड़े अतिरिक्त सबूत मंत्रालय को दे सकते है.
मंत्रालय को पहले भी भेजे जा चुके है कई पत्र
स्वामी ने कहा था कि वे मंत्रालय को पहले भी कई पत्र भेज चुके है. लेकिन उन्हें किसी का जवाब नही आया. उन्होंने कहा कि यह प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 विशेष रूप से अधिनियम की धारा 3 और 4 में मानदंडों को पूरा करता है. राम सेतु प्राचीन स्मारक कहलाने के लिए सभी निर्धारित मानदंडों को पूरा करता है, क्योंकि यह ऐतिहासिक, पुरातात्विक और कलात्मक शर्तो को पूरा करता है.
दरअसल सुब्रमण्यम स्वामी ने रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने के लिए याचिका दायर की थी. अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि राम सेतु लाखों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है.
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-भारत एक्सप्रेस
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