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इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी का मामला: सीजेआई बी. आर गवई की अध्यक्षता वाला कॉलेजियम 33 उम्मीवारों से करेगा बातचीत

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहल शुरू कर दी है. सीजेआई बी. आर गवई की अध्यक्षता वाला कॉलेजियम 1 सितंबर को 33 उम्मीवारों से बातचीत करेगा.

allahabad high court
Edited by Vaibhav Gupta

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहल शुरू कर दी है. सीजेआई बी. आर गवई की अध्यक्षता वाला कॉलेजियम 1 सितंबर को 33 उम्मीवारों से बातचीत करेगा.

पांच सदस्यीय कॉलेजियम में सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल है. कॉलेजियम द्वारा बुलाए गए 33 उम्मीदवारों में 20 न्यायिक अधिकारी और 13 वकील शामिल हैं, जो हाई कोर्ट जज बनने के रेस में है.

वर्तमान में 77 जज कार्यरत

इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के लिए कुल 160 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 77 जज कार्यरत है. जो आधे से भी कम है. हालही में कॉलेजियम ने तीन जजों का ट्रांसफर कर दिया है. जिन जजों का कॉलेनियम ने ट्रांसफर किया है, उनमें जस्टिस संजय कुमार सिंह, जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल और जस्टिस डोनाडी रमेश शामिल हैं.

कोर्ट में लंबित मुकदमों की स्थिति बेहद चिंताजनक

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की स्थिति बेहद चिंताजनक है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुल 11,55,225 मामले लंबित हैं. राज्य की 24 करोड़ आबादी के मुकाबले हाई कोर्ट में हर 30 लाख लोगों पर महज एक जज है, और औसतन एक-एक जज के पास 14, 623 लंबित मुकदमे है.

हालही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लंबित मामलों को देखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और समयबद्ध तरीके से जजों की नियुक्ति पर जोर दिया था. दरअसल जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 में लिखित एक जटिल प्रक्रिया के तहत की जाती है.

इसमें राज्य सरकार के परामर्श के बाद हाई कोर्ट के दो वरिष्ठतम जज द्वारा एक सूची तैयार की जाती है. इसके बाद सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजा जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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