प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन पहुंचे. उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने पर चर्चा की. पीएम मोदी और जिनपिंग की यह मुलाकात टैरिफ की वजह से भारत का अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच हुई.
पीएम मोदी की यह यात्रा उस समय की याद दिलाती है जब पांच साल पहले भारत के ‘सुपर जासूस’ कहे जाने वाले अजीत डोभाल ने देश की संप्रभुता को लेकर कड़ा रुख अपनाया था.
जब डोभाल मीटिंग छोड़ कर निकल गए
सितंबर 2020, कोविड-19 महामारी के चरम पर था. तब कूटनीति काफ़ी हद तक ऑनलाइन हो गई थी और एससीओ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वर्चुअल बैठक कर रहे थे.
इसी सत्र (SCO Summit 2020) के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉ. मोईद यूसुफ़ ने एक नया मैप दिखाया. उस मैप में भारत के अभिन्न अंग, जम्मू-कश्मीर और जूनागढ़ पर पाकिस्तान अपना दावा कर रहा था. यह एससीओ के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था, जो द्विपक्षीय विवादों को ऐसे मंचों पर लाने की मनाही करते हैं.
भारत ने इस मैप पर तुरंत आपत्ति जताई. तब बैठक की अध्यक्षता कर रहे रूस द्वारा पाकिस्तान से नक्शा हटाने के लिए बार-बार किए गए प्रयासों के बावजूद चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया गया. उसी समय भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बैठक से बाहर चले गए.
यह एक संदेश था जिसमें कहा गया था कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल नहीं उठने देगा. बाद में रूस ने कहा की कि वह पाकिस्तान की भड़काऊ कार्रवाई का समर्थन नहीं करता है और रूसी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पात्रुशेव ने बैठक से बाहर जाने के लिए अजीत डोभाल की प्रशंसा की.
पर्दे के पीछे का जासूस
अजीत डोभाल (Ajit Doval) के करियर का ट्रैक रिकॉर्ड किसी जासूसी थ्रिलर जैसा है. 1971 और 1978 के बीच, यह ‘सुपर जासूस’ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक मुस्लिम मौलवी बनकर पाकिस्तान में गुप्त रूप से रहा. उसने पाकिस्तान की सैन्य योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की जिससे भारत को रणनीतिक निर्णय लेने में मदद मिली.
भारत में अजीत डोभाल ने घरेलू विद्रोहों के दौरान शांति वार्ता में मदद की, जिसमें मिज़ो विद्रोही नेताओं के साथ बातचीत भी शामिल थी. इसी की वजह से 1986 में मिज़ो शांति समझौता हुआ. वह 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर का भी हिस्सा थे, जिसमें उन्होंने आतंकवादियों के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसपैठ की थी.
1999 में उन्होंने कंधार विमान अपहरण के दौरान बातचीत में मदद की और भारतीय बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की. 2014 में, उन्होंने इराक में आतंकी संगठन आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाई गई 46 भारतीय नर्सों की वापसी को भी कोऑर्डिनेट कर रहे थे. इसके बाद 2016 में LoC के पार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी लॉन्चपैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की योजना की देखरेख की.
-भारत एक्सप्रेस
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