Su-57 Stealth Fighter Jet: दुनिया के सबसे बड़े देश रूस ने भारत को एक अहम डिफेंस प्रपोजल दिया है, जिसमें उसके सबसे उन्नत Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट को भारत में ही निर्मित करने की पेशकश की गई है. यह ऑफर ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नए लड़ाकू विमानों की तलाश में है. रूसी टीम वर्तमान में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक प्लांट में निवेश की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है. अगर यह सौदा सफल होता है, तो भारत को 2-3 स्क्वाड्रन (लगभग 36-54 जेट) मिल सकते हैं, जो IAF की क्षमता को दोगुना कर देंगे. Su-57 की कीमत लगभग 50 मिलियन डॉलर प्रति जेट है, जो अमेरिकी F-35 (110 मिलियन डॉलर) से काफी सस्ता है. यह प्रस्ताव ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करेगा और रोजगार सृजन करेगा.
रूस का प्रपोजल और रूसी टीम की स्टडी
रूस ने Su-57E निर्यात संस्करण को फरवरी 2025 में बेंगलुरु के एयरो इंडिया शो में प्रदर्शित किया था, जिसके बाद यह ऑफर सामने आया. रूसी टीम HAL नासिक में उत्पादन सुविधाओं का मूल्यांकन कर रही है, जिसमें तकनीकी हस्तांतरण (ToT) शामिल है. अगर सौदा होता है, तो 20-30 जेट 3-4 वर्षों में डिलीवर हो सकते हैं. रूस HAL की सुविधाओं को अपग्रेड करने में मदद करेगा, जो पहले से ही Su-30MKI जेट बना रहा है. यह प्रस्ताव भारत-रूस रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देगा, खासकर जब अमेरिका CAATSA प्रतिबंधों और टैरिफ नीतियों से दबाव डाल रहा है. भारत पहले से ही रूसी S-400 और S-500 सिस्टम खरीद रहा है.

Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट क्या है?
Su-57, जिसे NATO ने ‘फेलन’ नाम दिया है, रूस का पांचवीं पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर जेट है. इसका पहला उड़ान परीक्षण 2010 में हुआ था और 2020 में रूसी वायुसेना में शामिल किया गया. यह जेट स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिसमें रडार-अवशोषक सामग्री, आंतरिक हथियार बे और विशेष बॉडी डिजाइन शामिल हैं.
रूस के पास वर्तमान में 21 प्रोडक्शन मॉडल हैं, और 76 और ऑर्डर पर हैं. यूक्रेन संघर्ष में इसका उपयोग लड़ाई परीक्षण के लिए किया गया है. निर्यात संस्करण Su-57E को भारत जैसे खरीदारों के लिए अनुकूलित किया जा रहा है, जिसमें अल्जीरिया पहला ग्राहक हो सकता है.
इसका रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) मात्र 0.1 वर्ग मीटर है, जो इसे रडार पर एक छोटे पक्षी जैसा दिखाता है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पीछे से इसकी स्टील्थ कमजोर है.

SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट की खूबियां
- स्टील्थ तकनीक: रडार-अवशोषक सामग्री और आंतरिक हथियार बे से RCS मात्र 0.1 वर्ग मीटर, जो इसे दुश्मन रडार से छिपाता है.
- सुपरक्रूज क्षमता: आफ्टरबर्नर के बिना Mach 1.3-1.6 की स्पीड, जो ईंधन बचाती है और लंबी दूरी की उड़ानें संभव बनाती है.
- सुपरमैन्यूवरेबिलिटी: थ्रस्ट वेक्टरिंग से 3D मैन्यूवर, जो हवाई युद्ध में श्रेष्ठता प्रदान करती है.
- इंजन: दो AL-41F1 इंजन (अपग्रेड AL-51F1), प्रत्येक 147-180 kN थ्रस्ट, अधिकतम स्पीड 2,450 km/h (Mach 2+).
- रेंज और पेलोड: कॉम्बैट रेंज 1,900-2,000 km, फेरी रेंज 7,800 km (रिफ्यूलिंग के साथ), 10 टन हथियार ले जाने की क्षमता.
- रडार और सेंसर्स: N036 Byelka AESA रडार से 360-डिग्री कवरेज, AI-असिस्टेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सेंसर फ्यूजन.
- हथियार: R-37M एयर-टू-एयर मिसाइल, Kh-69 क्रूज मिसाइल, एंटी-शिप हथियार, न्यूक्लियर कैपेबल.
- मल्टी-रोल: एरियल कॉम्बैट, ग्राउंड और मैरीटाइम स्ट्राइक, S-70 Okhotnik ड्रोन के साथ ‘लॉयल विंगमैन’ मोड.
- डिजाइन: लंबाई 20.1 m, विंगस्पैन 14 m, ऊंचाई 4.8 m, कम्पोजिट मटेरियल्स से हल्का और मजबूत.
- सुरक्षा: एक्सप्लोजन-प्रूफ फ्यूल सिस्टम और इनेर्ट गैस फायर सप्रेशन से उच्च कॉम्बैट सर्वाइवेबिलिटी.
- अधिकतम टेकऑफ वेट: 35,000 kg, फ्यूल कैपेसिटी 22,700 lb, सर्विस सीलिंग 20,000 m.
भारतीय वायुसेना की जरूरतें क्या हैं?
IAF वर्तमान में 31 स्क्वाड्रन के साथ है, जबकि लक्ष्य 42 का है. Su-57 का आगमन IAF को स्टील्थ एज प्रदान करेगा, खासकर हिमालयी सीमा पर. यह जेट भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट को भी सपोर्ट करेगा, जिसकी पहली उड़ान 2028 में और कमीशनिंग 2035 तक होनी है.
Su-57 की मदद से IAF की हवाई श्रेष्ठता बढ़ेगी, और स्थानीय उत्पादन से आत्मनिर्भरता आएगी. यह सौदा भारत-रूस साझेदारी को मजबूत करेगा, जहां भारत के 60% हथियार रूसी मूल के हैं, जिसमें 260 Su-30MKI शामिल हैं.

चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती
Su-57 का भारत में आगमन चीन के लिए बड़ा खतरा होगा, जो J-20 स्टील्थ जेट की बेड़े बढ़ा रहा है. पाकिस्तान भी इससे प्रभावित होगा, क्योंकि Su-57 की उन्नत क्षमताएं क्षेत्रीय हवाई शक्ति संतुलन बदल देंगी. इस जेट की स्टील्थ, सुपरक्रूज और लंबी दूरी की मिसाइलें भारत को मजबूत डिटरेंस प्रदान करेंगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करेगा, खासकर LAC और LoC पर.
इतिहास और भविष्य की संभावनाएं
भारत और रूस ने 2007 में फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) प्रोजेक्ट शुरू किया था, जो Su-57 पर आधारित था, लेकिन 2018 में भारत ने स्टील्थ और लागत चिंताओं के कारण बाहर हो गया. अब यह प्रस्ताव उस साझेदारी को पुनर्जीवित कर रहा है. रूस AMCA में भी मदद की पेशकश कर रहा है. अगर सौदा होता है, तो यह भारत की रक्षा स्वावलंबन को बढ़ावा देगा और वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्थिति मजबूत करेगा. कुल मिलाकर, Su-57 भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा.
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