GST Reforms: भारत में गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) की शुरुआत से ही इसे एक महत्वाकांक्षी सुधार माना गया था. धीरे-धीरे छोटे-छोटे बदलावों के साथ इसे लागू किया गया और अब जाकर यह और सरल होता दिख रहा है. बुधवार रात हुई जीएसटी (GST) काउंसिल की बैठक में एक अहम फैसला लिया गया है, टैक्स स्लैब (GST Slab) को सिमटाकर अब सिर्फ दो मुख्य दरें रखी जाएंगी. सिर्फ 5% और 18% मुख्य दरें रखी जाएंगी. वहीं, लग्ज़री और हानिकारक सामानों (Sin Goods) पर 40% का अलग टैक्स जारी रहेगा.
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कौन-सा सामान किस स्लैब में जाएगा?
अभी तक 12% टैक्स (Tax) वाले ज़्यादातर सामान अब सीधे 5% स्लैब में आ जाएंगे. वहीं, 28% वाले कई सामानों को 18% पर लाने की तैयारी है. ज़रूरी चीज़ों पर टैक्स पहले की तरह शून्य ही रहेगा. इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा ये है कि अब व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए टैक्स दरों को लेकर उलझन काफी हद तक खत्म हो जाएगी. कम स्लैब होने से कीमतें भी ज़्यादा साफ़-साफ़ नज़र आएंगी.
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टैक्स चोरी पर सख्ती और आसान नियम
पिछले कुछ सालों में जीएसटी (GST) के नियमों में कई अहम सुधार हुए हैं. 2018 में ई-वे बिल शुरू हुआ, जिससे राज्यों की सीमाओं पर टैक्स चेकपोस्ट की झंझट खत्म हुई और प्रशासन को माल की आवाजाही का लाइव डेटा मिलने लगा. इसके बाद GSTR-2B लाया गया, जिससे टैक्सपेयर्स को इनपुट टैक्स (Tax) क्रेडिट को लेकर पहले जैसी अनिश्चितता नहीं रही. अब ई-इनवॉइसिंग व्यवस्था लागू है.
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-भारत एक्सप्रेस
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