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बाघों के शिकार और तस्करी की सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने जारी कर नोटिस मांगा जवाब

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में बाघ और अन्य वन्यजीवों के किए जा रहे शिकार और उसके व्यापार की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी, महाराष्ट्र सरकार, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

Edited by Vaibhav Gupta

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में बाघ और अन्य वन्यजीवों के किए जा रहे शिकार और उसके व्यापार की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी, महाराष्ट्र सरकार, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है.

बाघ प्रजाति नहीं बल्कि परिस्थितिकी का स्तंभ

यह याचिका अधिवक्ता गौरव बंसल की ओर से दायर की गई है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील देते हुए कहा कि बाघ एक प्रजाति नहीं, बल्कि भारत की परिस्थितिकी का स्तंभ हैं. 70 फीसदी से अधिक जंगली बाघ भारत में है, ऐसे में उनकी तस्करी केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का भी मामला है.

दायर याचिका में अखबारों की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया में बाघ की हड्डियों से बनने वाले बोन ग्लू (हड्डी से बनी गोंद जैसी दवा) की भारी मांग है. इसे पारंपरिक औषधि और शक्ति वर्धक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. जंगली बाघों से बना बोन ग्लू कैद में पाले गए बाघों से बने उत्पादों से ज्यादा महंगा बिकता है.

41 बाघ व 55 तेंदुए बने शिकारियों का शिकार

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने हाल ही में खुलासा किया है कि पिछले पांच साल में महाराष्ट्र में 41 बाघ और 55 तेंदुए शिकारियों का शिकार बने. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के जंगलों से बाघों के अंग तस्करी कर म्यांमार तक पहुचाए गए. रिपोर्ट के मुताबिक हवाला नेटवर्क और डिजिटल भुगतान के जरिए करोड़ों की लेन-देन हुई है.

कई कुख्यात शिकारी समुदाय, पारधी, बहेडिया, बावरिया और सपेरा इस नेटवर्क में शामिल पाए गए है. इसके अलावे म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट इसमें शामिल है. एसआईटी ने सिफारिश की है कि स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की स्थापना, इंटर-एजेंसी कॉर्डिनेशन जिसमें वन, पुलिस, नारकोटिक्स, ईडी शामिल हो.

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-भारत एक्सप्रेस



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