नबालिग बेटी को पोर्न देखने के लिए मजबूर कर पांच सालों से उसका बलात्कार करने के आरोपी पिता की दिल्ली हाईकोर्ट ने मिली जमानत को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह चौकाने वाला है. कोर्ट ने आरोपी को साथ दिन के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है. यह मामला दर्ज होने के नौ दिन बाद ही उसे निचली अदालत से जमानत मिल गया था और आरोपी अभी तक जमानत पर है.
पीड़िता का दर्द और पिता की जिम्मेदारी
मामला वर्ष 2021 का है. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने आरोपी पिता से कहा कि अतिरिक सेशन जज ने अहम तथ्यों को नजरअंदाज किया और गलत आधार पर जमानत दी. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के अनुसार वह लगभग पांच साल तक अपने पिता के इन घिनौने कृत्यों का शिकार होती रही, जब वह 10 साल की थी, जबकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका ही कर्तव्य था.
अगर पिता के ऐसे कृत्य सत्य पाए जाते हैं तो इससे ज्यादा विकृत और चौंकाने वाली कोई बात नहीं हो सकती है. अदालत ने यह कहते हुए जमानत के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि यह विकृत है, क्योंकि पीड़ित बच्ची को हुए आघात पर विचार किए बिना इसे पारित किया गया था.
जबकि जांच अभी भी लंबित है. मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपी मनगढ़ंत है. झूठा है. ताकि तलाक को मजबूत बनाया जा सकें. बता दें कि आरोपी को 2021 में गिरफ्तार किया गया और उसी साल जून में उसे जमानत मिल गई.
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भारत एक्सप्रेस
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