Madhya Pradesh Custodial Death: मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां दो पुलिसकर्मी खुद कानून से भागते फिर रहे हैं और अब उन पर पकड़ बनाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है. मामला हिरासत में मौत से जुड़ा है और इस पर सुप्रीम कोर्ट तक सख्त रुख दिखा चुका है.
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के गुना जिले के म्याना थाने में जुलाई 2023 में 25 वर्षीय देव पारधी को चोरी के आरोप में हिरासत में लिया गया था. देव के साथ उसके चाचा गंगाराम पारधी को भी पकड़ा गया था. उसी रात देव की मौत हो गई. पुलिस ने दावा किया कि हार्ट अटैक से उसकी जान गई, लेकिन परिवार का आरोप था कि कस्टडी में देव को बेरहमी से पीटा गया जिससे उसकी मौत हो गई.
परिजनों का कहना था कि पूरी तरह स्वस्थ युवक को अचानक हार्ट अटैक आना शक के दायरे से बाहर नहीं है. आक्रोश इतना बढ़ा कि देव पारधी की मंगेतर ने आत्मदाह की कोशिश तक कर डाली थी.
सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी
परिवार ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाई. कोर्ट ने 15 मई 2025 को सुनवाई करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि एक महीने के भीतर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जाए. लेकिन समय पर गिरफ्तारी नहीं होने पर देव की मां फिर अदालत पहुंचीं.
हालिया सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि “आप बाकी मामलों में कुछ ही सेकंड में गिरफ्तारी कर लेते हैं, लेकिन यहां असहाय दिख रहे हैं. फरार होने का मतलब है कि कोई उन्हें बचा रहा है.”
सीबीआई की कार्रवाई अब तक
सीबीआई ने इस केस में अब तक तीन गिरफ्तारियां की हैं, जिनमें एसआई देवराज सिंह परिहार और टाउन इंस्पेक्टर जुबैर खान शामिल हैं. इनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है. लेकिन मुख्य आरोपी दो पुलिसकर्मी संजीत सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाहा अब तक फरार हैं. दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है, भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और अब पकड़वाने पर 2-2 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया है.
यह मामला सिर्फ एक हिरासत मौत का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है. सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सीबीआई की कार्रवाई के बावजूद अगर आरोपी पुलिसकर्मी गिरफ्त से बाहर हैं, तो यह बताता है कि या तो उन्हें संरक्षण मिल रहा है या फिर जांच एजेंसी अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने से बच रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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