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वरिष्ठ नागरिकों के उपहार में परिवार के प्रति होता है सम्मान: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का परिवार के सदस्यों को दिए गए उपहार में उनके प्रति आदर व सम्मान अंतर्निहित है. उपहार डीड का निष्पादन होने के बाद वरिष्ठ नागरिक को भरण-पोषण न करने का अर्थ होगा कि संपत्ति धोखाधड़ी या जबरदस्ती से हस्तांतरित कराई गई है.

Delhi Highcourt
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का परिवार के सदस्यों को दिए गए उपहार में उनके प्रति आदर व सम्मान अंतर्निहित है. उपहार डीड (गिफ्ट डीड) का निष्पादन होने के बाद वरिष्ठ नागरिक को भरण-पोषण न करने का अर्थ होगा कि संपत्ति धोखाधड़ी या जबरदस्ती से हस्तांतरित कराई गई है. इसे शून्य घोषित किया जा सकता है.

वरिष्ठ नागरिक वापस ले सकते संपत्ति

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि इस तरह के डीड में स्पष्ट रूप से यह शर्त शामिल है कि संपत्ति लेने वाला वरिष्ठ नागरिक को बुनियादी आवश्यकताएं मुहैया कराएगा. अन्यथा वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 23(1) (उचित देखभाल प्रदान न किए जाने पर संपत्ति को पुन: प्राप्त करने की अनुमति) के तहत वरिष्ठ नागरिक संपत्ति वापस ले सकते हैं. यह ध्यान में रखना चाहिए कि अगर माता-पिता अपनी संपत्ति बेटे या बेटी को देते हैं तो वे ऐसा केवल उनके प्रति आदर व सम्मान के साथ और इस आशा के साथ करते हैं कि बुढ़ापे में उनकी देखभाल की जाएगी. इसलिए आदर व सम्मान उपहार डीड के निष्पादन की एक निहित शर्त है.

पीठ ने उक्त टिप्पणियां 88 वर्षीय महिला दलजीत कौर की अपनी बहू के पक्ष में निष्पादित संपत्ति का उपहार डीड को रद्द करने के जिला मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए की. साथ ही कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अपनी संपत्ति से अलग होने के बाद बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता है.

उपहार डीड को रद्द करने से किया इनकार

यह विवाद तब शुरू हुआ जब दलजीत कौर ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण कानून के तहत भरण-पोषण न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 में जनकपुरी की अपनी संपत्ति वरिंदर कौर को हस्तांतरित कर दिया. उसके बाद उनकी उपेक्षा की गई. उन्हें चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई और यहां तक कि उन्हें धमकाया भी गया.

न्यायाधिकरण ने वर्ष 2019 में उपहार डीड को रद्द करने से इनकार कर दिया. दलजीत कौर ने उसे जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में चुनौती दी जिसे न्यायाधिकरण के आदेश को जुलाई 2023 में पलट दिया गया और उपहार विलेख को रद्द करने का आदेश दिया गया. वरिंदर कौर ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जिसने जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा.

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-भारत एक्सप्रेस



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