Juna akhada : हरिद्वार, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा अपने 22वें दिन पवित्र आदि कैलाश पर्वत और ओम पर्वत के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के पश्चात आज माया देवी मंदिर, हरिद्वार में सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गई.
हिमालय से हरिद्वार तक की इस अद्भुत यात्रा में छड़ी ने मानसखंड के प्रमुख तीर्थों का भ्रमण कर साधु-संतों और श्रद्धालुओं को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की.
हरिद्वार में हुआ भव्य स्वागत
शनिवार देर शाम जब पवित्र छड़ी माया देवी मंदिर (Juna akhada)पहुंची, तो पूरे वातावरण में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज उठे.
हिमालय योगी महामंडलेश्वर वीरेन्द्रानंद गिरि महाराज, छड़ी महंत श्री महंत पुष्कर गिरी, श्री महंत पशुपति गिरी, श्री महंत रतन गिरी, श्री महंत आकाश गिरी, और श्री महंत रूद्रानंद गिरी के नेतृत्व में यह यात्रा मंदिर पहुंची.

पवित्र छड़ी पर हुई पुष्प वर्षा
इस अवसर पर जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्री महंत हरी गिरी महाराज, वरिष्ठ सभापति श्री महंत प्रेम गिरी महाराज(Juna akhada), मनकामेश्वर मठ लखनऊ की पीठाधीश्वर महंत दिव्या गिरी, महामंत्री श्री महंत महेश पुरी और श्री महंत महाकाल गिरी ने ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा के साथ पवित्र छड़ी का स्वागत किया. इसके बाद श्री आनंद भैरव और अधिष्ठात्री देवी माया देवी की पूजा-अर्चना कर छड़ी को मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया.
महामंडलेश्वर वीरेन्द्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि “पवित्र छड़ी यात्रा न केवल साधु-संतों का आध्यात्मिक आयोजन है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है।”

मानसखंड के पौराणिक तीर्थों की परिक्रमा
यात्रा ने अपने द्वितीय चरण में कर्णप्रयाग से प्रारंभ होकर मानसखंड के प्रमुख पौराणिक स्थलों की परिक्रमा की. अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर पूजा-अर्चना के बाद आदि बद्री धाम में दर्शन किए. इसके उपरांत यात्रा थराली, बागनाथ शिव मंदिर (बागेश्वर), और बैजनाथ धाम होते हुए आगे बढ़ी. बागेश्वर में श्री महंत शंकर गिरी, विधायक सुरेश गढ़िया, पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल, और भाजपा जिला अध्यक्ष प्रभा गढ़िया ने श्रद्धालुओं के साथ छड़ी यात्रा का स्वागत किया.
कुमाऊं में छड़ी यात्रा को लेकर रहा उत्साह
Juna akhada की पवित्र छड़ी के यात्रा मार्ग में खेड़केश्वर महादेव, काली मंदिर रानीखेत, बिनसर महादेव, दूनागिरी, भूमिया थान, बूढ़ा केदार, नंदा देवी, सूर्य मंदिर कटारमल, कसार देवी, गोलज्यू देव, और गणनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई. जागेश्वर धाम पहुंचने के बाद छड़ी यात्रा हाट काली मंदिर, चौकड़ी, और थल महादेव मंदिर होते हुए धारचूला पहुंची,
जहां ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पवित्र छड़ी का पारंपरिक स्वागत किया.
कैप्टन भूपेंद्र रावल, पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष ने कहा कि “धार्मिक यात्राएं न केवल आस्था का संगम हैं, बल्कि वे समाज में एकता और सद्भाव का संदेश देती हैं.”
आदि कैलाश और ओम पर्वत का दिव्य दर्शन
Juna akhada की पवित्र छड़ी ने हिमालय शिवशक्ति पीठ वीरेन्द्रानंद गिरि आश्रम, तवाघाट से पूजा-अर्चना के बाद आदि कैलाश और ओम पर्वत की कठिन यात्रा आरंभ की. सीमा क्षेत्र के गुंजी, नाभि, और कोटि गांवों में भोटिया-बोक्सा जनजातियों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया. नागा संन्यासियों को नंगे पांव कठिन रास्तों पर चलते देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे.
आदि कैलाश में पर्वती कुंड में पवित्र छड़ी का स्नान और पूजा के बाद पवित्र छड़ी ने ओम पर्वत के दर्शन किए और फिर वापसी यात्रा शुरू की.
टनकपुर में मुख्यमंत्री धामी ने किए दर्शन
टनकपुर पूर्णागिरि माता मंदिर में दर्शन के बाद पवित्र छड़ी के लौटने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं छड़ी के दर्शन किए और juna akhada के साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “आदि कैलाश की यह पवित्र छड़ी यात्रा उत्तराखंड की आस्था और हिमालय की शक्ति का संगम है. मैं इस पवित्र अवसर पर जूना अखाड़े के सभी साधु-संतों का अभिनंदन करता हूँ.”
हरिद्वार में समापन और आशीर्वाद
हरिद्वार के Juna akhada के प्राचीन माया देवी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पवित्र छड़ी यात्रा का समापन हुआ. पूरी यात्रा के दौरान भक्ति, साधना और उत्साह का वातावरण बना रहा.
श्री महंत प्रेम गिरी महाराज ने कहा कि “छड़ी यात्रा का प्रत्येक पड़ाव अध्यात्म का दीपक प्रज्वलित करता रहा. हम सब इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं.”
छड़ी यात्रा ने जलाया आस्था का दीप
22 दिवसीय इस पवित्र यात्रा ने न केवल हिमालय से हरिद्वार तक आस्था का दीप जलाया, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, श्रद्धा और सनातन परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया. इसके साथ ही Juna akhada के संतों ने छड़ी यात्रा के दौरान उत्तराखंड की समस्याओं को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट भी बनाई है जो शीघ्र Juna akhada के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी महाराज के नेतृत्व में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को सौंपेंगे.
भारत एक्सप्रेस
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