Bharat Express DD Free Dish

क्यों खतरे में नहीं है संविधान? जानिए पूर्व CJI बीआर गवई का जवाब

Justice BR Gavai On Constitution: आजकल देश में एक बात सियासी गलियों में चल रही है कि संविधान खतरे में है. इस बीच न्यूज एजेंसी से बात करते हुए पूर्व CJI बीआर गवई ने इसपर जवाब दिया है. आइये जानें उन्होंने क्या कहा?

Why Constitution not in danger Former CJI BR Gavai answer

Justice BR Gavai On Constitution: भारत की सियासी गलियों में इन दिनों एक बात आम है कि संविधान खतरे में है. जिस नेता को देखो वही संविधान की किताब को लेकर घूमता है और देश को खतरे में बता देता है. ऐसे में देश के पूर्व CJI बीआर गवई ने इस विषय पर जवाब दिया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने संविधान की भूमिका पर बेहद स्पष्ट और सारगर्भित विचार रखा. उनके जवाबों ने न सिर्फ संवैधानिक ढांचे की मजबूती पर विश्वास जताया, बल्कि देश की तीनों संस्थाओं के बीच संतुलन और जिम्मेदारी की भावना को भी रेखांकित किया.

क्यों नहीं है संविधान पर खतरा? (Constitution not in danger)

पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा कि संविधान बदला नहीं जा सकता. आगे उन्होंने समझाया कि 1973 के केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि संसद संविधान की ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ में कोई संशोधन नहीं कर सकती. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद संविधान की मूल आत्मा को किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकता.

जस्टिस बीआर गवई का बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में संवैधानिक भविष्य और संस्थाओं के अधिकारों पर बहस जारी है. पूर्व सीजेआई ने दोहराया कि भारत का संविधान बेहद मजबूत और संतुलित ढंग से तैयार किया गया है, इसलिए इसे खतरे में बताना उचित नहीं है.

राजनीतिक लोकतंत्र की सफलता की शर्त

जब उनसे बाबा साहेब अंबेडकर के सपने और संवैधानिक मूल्यों पर पूछा गया, तो गवई ने कहा कि बाबा साहेब ने सिर्फ राजनीतिक न्याय का सपना नहीं देखा था, बल्कि उनका सपना सामाजिक और आर्थिक न्याय का भी था. उनका मानना था कि राजनीतिक लोकतंत्र तभी सफल होगा जब सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी उसके साथ चले. उन्होंने आगे कहा कि देश की तीन प्रमुख संस्थाएं (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) इन्हीं मूल्यों के आधार पर काम करें, तभी लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी.

ये भी पढ़ें: ‘ज्यूडिशियरी में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं’: पूर्व सीजेआई बीआर गवई

गवई ने इस बातचीत में यह भी संकेत दिया कि देश की संस्थाओं को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो सके और न्याय व्यवस्था आम लोगों के लिए और आसान बने. पूर्व सीजेआई के इन बयानों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत का संविधान न सिर्फ स्थायी और मजबूत है, बल्कि ऐसी सोच और विजन पर आधारित है जो हर नागरिक के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करता है.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read