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संसद के शीतकालीन सत्र में दिखा नया राजनीतिक समीकरण, प्रियंका गांधी फ्रंट पर और राहुल साइडलाइन

Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र ने भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया. पीएम मोदी की सरकार मजबूती से काम करती दिखी, वहीं कांग्रेस में प्रियंका गांधी फ्रंटलाइन पर नजर आईं और राहुल गांधी साइडलाइन होते दिखे.

Parliament Winter Session: संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को खत्म हुआ और इसने भारतीय राजनीति में दो बड़े बदलावों के संकेत दिए. पहला बदलाव यह कि 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें घटने के बाद जो धारणा बनी थी कि पीएम मोदी कमजोर हो गए हैं, वह गलत साबित हुई. इस सत्र ने साफ कर दिया कि बीजेपी सरकार उतनी ही मजबूती से काम कर रही है जितनी पिछली दो बार करती रही है.

कांग्रेस में प्रियंका का उभार

दूसरा बड़ा बदलाव कांग्रेस में देखने को मिला. सत्र के शुरुआती हिस्से से ही प्रियंका गांधी ने कांग्रेस और सहयोगी दलों को फ्रंट से लीड किया. वहीं राहुल गांधी इस दौरान साइडलाइन होते दिखे. यह कांग्रेस की राजनीति में नया मोड़ माना जा रहा है.

पीएम मोदी से चाय पर चर्चा

19 दिसंबर को सत्र के समापन के दिन प्रियंका गांधी ने स्पीकर द्वारा आयोजित बैठक में बड़ी सहजता से हिस्सा लिया. इस बैठक में पीएम मोदी, उनके मंत्री और सांसद मौजूद थे. प्रियंका ने न सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड से जुड़े मुद्दों पर पीएम से चर्चा की बल्कि माहौल हल्का-फुल्का भी रहा. राहुल गांधी के रहते ऐसा नजारा कभी देखने को नहीं मिला था.

गडकरी से मुलाकात

सत्र के एक दिन पहले प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उनके चैंबर में मुलाकात की. उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान ही मिलने की इच्छा जताई थी और गडकरी ने तुरंत हामी भर दी. राहुल गांधी के लिए इस तरह का व्यवहार असामान्य माना जाता है. प्रियंका ने दो दिनों में जिस तरह से विपक्ष की नेता की भूमिका निभाई, वह कांग्रेस के लिए नया अनुभव रहा.

मतभेद की चर्चा

इसी बीच केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दावा किया कि राहुल और प्रियंका के बीच मतभेद चल रहे हैं. उनका कहना था कि प्रियंका के भाषणों से राहुल की तुलना शुरू हो गई और इससे नाराज होकर राहुल विदेश चले गए.

सहयोगियों से दूरी

राहुल गांधी ने हाल के महीनों में ईवीएम और वोट चोरी को बड़ा मुद्दा बनाया था लेकिन बिहार चुनाव में कांग्रेस और महागठबंधन की हार ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक को कमजोर कर दिया. इसके बाद सहयोगी दलों ने राहुल से दूरी बनानी शुरू कर दी. उमर अब्दुल्ला ने वोट चोरी को कांग्रेस का एजेंडा बताया, सुप्रिया सुले ने EVM की तारीफ की और ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस से दूरी दिखा दी.

मोकिम ने सोनिया को लिखी चिट्ठी

8 दिसंबर को ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर किसी युवा नेता को कमान सौंपने की मांग की थी. उन्होंने प्रियंका गांधी का नाम सुझाया और कांग्रेस की लगातार हार पर सवाल उठाए. हालांकि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया लेकिन इसके बाद प्रियंका की सक्रियता बढ़ी.

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सत्र में जो बदलाव देखने को मिले, वे ये हैं कि बीजेपी सरकार पूरी ताकत से काम कर रही है और कांग्रेस में प्रियंका गांधी का उभार नया राजनीतिक समीकरण बना रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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