Kartikey Deepam Dispute: कार्तिकेय दीपम विवाद से जुड़े मामले में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को कायम रखा है. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखना पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है. साथ ही बेंच ने यह भी कहा कि सरकार को अपने निर्णय राजनीतिक कारणों से प्रभावित होकर नहीं लेने चाहिए.
दीपथून देवस्थानम की संपत्ति
अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘दीपथून’ उस जगह पर स्थित है, जो देवस्थानम की जमीन के अंतर्गत आती है. इस निर्णय के साथ विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर चल रही बहस समाप्त हो गई. साथ ही कोर्ट ने प्रशासन को चेतावनी दी कि वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाए और धार्मिक परंपराओं तथा सार्वजनिक शांति के बीच संतुलन बनाए रखे.
सरकार को नसीहत
मद्रास हाईकोर्ट ने स्टालिन सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान करते समय निष्पक्षता बनाए रखना बेहद आवश्यक है. अदालत ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक शांति से जुड़े मामलों में सरकार की भूमिका निर्णायक होती है और उसे राजनीतिक प्रभाव से ऊपर उठकर काम करना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने एकल न्यायाधीश के पूर्व आदेश को सही ठहराते हुए प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी.
क्या है मामला?
तमिलनाडु के थिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्या स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह मौजूद हैं. विवाद का मुख्य केंद्र दरगाह से लगभग 15 मीटर दूर स्थित दीपथून स्तंभ है, जहां कार्तिगै दीपम जलाने को लेकर मतभेद सामने आए. हिंदुत्व संगठनों ने यहां दीप प्रज्ज्वलन की अनुमति मांगी थी. मद्रास हाईकोर्ट ने 2025 में इस पर छूट भी दे दी थी लेकिन तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था की आशंका जताते हुए आदेश को लागू नहीं किया. इसी वजह से इलाके में तनाव बढ़ा और झड़पें हुईं.
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कोर्ट का अंतिम रुख
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश को कायम रखते हुए सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने स्पष्ट कहा कि धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक शांति के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और इस प्रक्रिया को राजनीति से प्रभावित नहीं होना चाहिए. फैसले के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा और झड़पें भी देखने को मिलीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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