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एक झूठ जो इतिहास बन गया! जानिए बर्फ से ढके द्वीप का नाम Greenland क्यों पड़ा?

Greenland Name Mystery: 21.6 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले ग्रीनलैंड में मात्र 56 हजार लोग रहते हैं. जिसकी वजह से ग्रीनलैंड (Greenland) दुनिया का सबसे कम घनत्व वाला देश माना जाता है. इस क्षेत्र में नाम के अलावा कुछ भी ग्रीन नहीं है.

Greenland Name Mystery Story

Greenland Name Mystery: ग्रीनलैंड! एक नॉर्डिक देश, जिसके लिए दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स यूरोप से टक्कर लेने को तैयार है. पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर मौजूद ग्रीनलैंड (Greenland) का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बर्फ की विशाल चादरों और ग्लेशियरों से ढका हुआ है.

21.6 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके में मात्र 56 हजार लोग रहते हैं. जिसकी वजह से ग्रीनलैंड (Greenland) दुनिया का सबसे कम घनत्व वाला देश माना जाता है. लेकिन आपने कभी सोचा है कि इस सूखे, बंजर और बर्फ के रेगिस्तान वाले इलाके का नाम आखिर किसने ग्रीनलैंड रख दिया. जिस क्षेत्र में नाम के अलावा कुछ भी ग्रीन नहीं है. क्या है इसके पीछे की कहानी? आइये बताते हैं.

Erik The Red
Erik The Red की तस्वीर (सोर्स-britannica)

वाइकिंग्स (vikings) से जुड़ी है यह कहानी

यह कहानी वाइकिंग्स से जुड़ी हुई है. वाइकिंग्स, स्कैंडेनेवियाई देशों (नॉर्वे, स्वीडन व डेनमार्क) के रहने वाले वो समुद्री योद्धा जिन्होंने 9वीं से लेकर 11वीं शताब्दी तक यूरोप के कई बड़े क्षेत्रों पर आक्रमण किये और अपना उपवनिवेश बनाया. ये मूर्ति पूजक योद्धा जहां भी पहुंचते थे वहां सिर्फ लाशें, आग और चीखें सुनाई देती थीं. वाइकिंग्स सिर्फ लूटेरे नहीं, बल्कि बेहतरीन समुद्री खोजी भी थे. ये लोग अपनी लंबी नावों पर सवार होकर यूरोप के तटों पर बसे शहरों और कस्बों पर हमला कर लूटपाट और हत्याएं करते थे. उनके इसी प्रवृति के चलते इन्हें वाइकिंग्स कहते हैं. स्कैंडिनेवियाई भाषा में इसका अर्थ समुद्री डाकू होता है.

viking
वाइकिंग का ट्रैवेल रूट (सोर्स- britannica)

एरिक द रेड (Erik The Red) ने बसाया ग्रीनलैंड

साल 980 में नॉर्वे मूल के एक वाइकिंग थोरवाल्ड के साथ उसके बेटे एरिक को हत्या के जुर्म में आइसलैंड से निकाल दिया गया. एरिक के बालों का रंग लाल था. इसलिए उसे एरिक द रेड कहा जाता था. पिता को छोड़ एरिक द रेड अपने कुछ साथियों के साथ 982 ईस्वी में आइसलैंड के पश्चिमी छोर से निकला. कुछ महीनों के बाद वह ऐसे द्वीप पर पहुंचा जहां चारों तरफ बर्फ की मोटी चादर फैली हुई थी. जिसे आज ग्रीनलैंड कहा जाता है.

एक झूठ जो सच बन गया

उसने उस द्वीप के दक्षिणी सिरे का चक्कर लगाया और मुहाने पर जाकर अपने साथियों के साथ बस गया. वहां उसने दो सालों तक खोजबीन करता रहा. एरिक द रेड हर इलाके को अलग-अलग नाम देता रहा. यह उसका इस द्वीप पर नियंत्रण बनाने का तरीका था. एरिक ने जिस जगह को अपने घर के लिए चुना उसे आज एरिकस्फ्योर्ड कहा जाता है. हालांकि एरिक ने उस जगह का नाम ब्राटाहलिड (खड़ी ढलान) नाम दिया. कुछ सालों तक एरिक द रेड इस द्वीप पर रहा. उसने सोचा क्यों ना इस जगह पर लोगों को लाकर बसाया जाए. जिसके बाद उसने इस नए द्वीप का नाम ग्रीनलैंड रख दिया. उसका विश्वास था कि ग्रीनलैंड नाम सुनकर लोग इसकी तरफ आकर्षित होंगे.

25 जहाजों में भरकर लोग पहुंचे ग्रीनलैंड

साल 985-986 में वो आइसलैंड लौट आया. एरिक द रेड ने आइसलैंड में यह झूठ फैला दिया कि यहां से सुदूर उत्तर में एक हराभरा देश मौजूद है. लोग उनके साथ चलें और वहां एक नई बस्ती बसाएं. एरिक की बातों में कई लोग उसके साथ आइसलैंड से रवाना हो गये. आइसलैंडवासियों की गाथाओं (Icelanders sagas) के मुताबिक एरिक द रेड के साथ आइसलैंड से 25 जहाजों में भरकर लोग इस नए देश के लिए रवाना हुए, लेकिन मात्र 14 जहाज ही सुरक्षित रूप से उस क्षेत्र में उतर पाये. जिसे एस्ट्रीबिग्ड (पूर्वी बस्ती) के रूप में जाना गया.

शुरुआत में इस बस्ती में कुल 400 से 500 लोग रहते थे. जिनकी कुल संख्या कभी भी 3000 से ज्यादा नहीं हुई.

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अब वाकई ग्रीन हो रहा ग्रीनलैंड

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म हो रही धरती ग्रीनलैंड के बर्फ को लगातार पिघला रही है. जिसकी वजह से ग्रीनलैंड के कई तटीय क्षेत्रों में घास उगने लगी है. बर्फ छंटने के बाद इस द्वीप के कई इलाकों में जमीन दिखने लगी है. मिनिरल्स से भरपूर इस क्षेत्र को लेकर अमेरिका की दिलचस्पी ज्यादा बढ़ गई है. अब बर्फ से ढंका रहने वाला ग्रीनलैंड वाकई ग्रीन हो रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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