Nirav Modi Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंग्लैंड और वेल्स के सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त अनुरोध पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इंग्लैंड और वेल्स के सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध किया है कि नीरव मोदी बैंक ऑफ इंडिया मुकदमे में गवाह के रूप में कार्यरत दिल्ली निवासी से गवाही प्राप्त करने की मांग की है. जस्टिस सी हरि शंकर ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर सहायता मांगी है.
ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने अनिमेष बरुआ की गवाही के लिए अनुरोध किया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने नीरव मोदी सहित अन्य पक्षों को भी पक्षकार बनाने की मांग की है. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि उन्हें केवल सुविधा के लिए पक्षकार बनाया गया है. ऐसा नही है कि यह मामला इस अदालत के समक्ष लंबित है. यह मामला हीरा व्यापारी नीरव मोदी और फायरस्टार डायमंड नामक कंपनी के मुकदमें से संबंधित है.
54 वर्षीय नीरव मोदी जो पंजाब नेशनल बैंक के 2 अरब डॉलर के कथित घोटाले के मामले में भारत मे वांछित है और वह पिछले 6 साल से ब्रिटेन के जेल में बंद है. बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पेश बैरिस्टर टॉम बीस्ली ब्रिटेन की कोर्ट में दलीलें रख रहे है.
नीरव मोदी पर लोन गारंटी का शिकंजा
उन्होंने कि नीरव के खिलाफ दुबई की कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दिए गए लोन की व्यक्तिगत गारंटी का मामला उठाया था. बीस्ली ने यह भी कहा था कि अगर नीरव मोदी का प्रत्यपर्ण होता है, तो वह हिरासत में रहेगा और अलग टाइम जोन में होगा. बैंक ने नीरव मोदी के पैसों की कमी के दावे पर भी सवाल उठाया था. जबकि नीरव मोदी की ओर से पेश वकीलों ने कहा था कि उसकी मानसिक स्थिति और आत्महत्या के विचारों के चलते यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन के अनुच्छेद 3 के तहत ये प्रत्यर्पण दमनकारी होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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