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‘एक साल में फैसला चाहिए तो कितनी कोर्ट लगेंगी, अंदाजा भी है?’ न्यायिक सुधार की मांग पर भड़के CJI सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सुधार की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया. सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता कमलेश त्रिपाठी से कहा कि यह याचिका केवल पब्लिसिटी स्टंट है.

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सुधार की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा यह पब्लिसिटी स्टंट के लिए याचिका दायर की गई है. कमलेश त्रिपाठी नामक व्यक्ति ने यह याचिका दायर की है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सवाल उठाया कि वह ऐसे निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कमलेश त्रिपाठी ने कहा कि वह अपनी दलीलें हिंदी में रखना चाहते है. देश में बदलाव लाने की अर्जी पर जवाब में सीजेआई ने कहा कि इस तरह की आकांक्षाओं के लिए औपचारिक याचिका उचित रास्ता नही है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप देश का बदलाव चाहते हैं? आपको इस तरह से याचिका दायर करने की कोई जरूरत नही है. आप एक पत्र लिखकर मुझे भेज दीजिए. हम देख लेंगे.

सीजेआई ने कहा कि आप लोग बाहर जाकर कैमरामैन के सामने खड़े होने के लिए याचिका मत डालिए.

न्यायिक सुधार की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप कह रहे है, एक साल में हर कोर्ट फैसला करे. ऐसी कितनी कोर्ट चाहिए. उन्होंने कहा कि आपको अंदाजा है कि इसके लिए देश में कितना कोर्ट चाहिए. इतना कोर्ट कहा से आएगा. सीजेआई ने कहा कि अगर न्यायिक सुधार का मामला है तो मैं कोर्ट कचहरी में किसी को नही आने दूंगा. उन्होंने कहा कि आप पत्र लिखकर दीजिए. हम उसको देखेंगे कि कैसे करना.

न्यायिक सुधार के लिए हमलोग यहां बैठे है. कोर्ट ने कहा कि आपको क्या- क्या न्यायिक सुधार चाहिए आप पत्र लिखकर हमें बताइए. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया चेतावनी

कोर्ट ने कहा कि दायर जनहित याचिका में एक टाइम लिमिट में निपटाने की मांग की गई हैं. कोर्ट ने कहा कि आपको यह समझना होगा कि कोर्ट और केस के बीच में जांच एजेंसियां भी काम करती है. कोर्ट ने कहा कि हम हर दिन जांच एजेंसी या अधिकारी से जांच के बारे में नही पूछ सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि एक साल में किसी मामले में फैसला देने के लिए आप अंदाजा भी नही लगा सकते है कि कितने कोर्ट की आवश्यकता पड़ेगी.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस तरह की याचिका दायर कर अपना समय बर्बाद ना करें और ना ही कोर्ट का समय बर्बाद करें.

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-भारत एक्सप्रेस



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