Sonia Gandhi Voter List Case: कांग्रेस संसदीय दल के अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है. सोनिया गांधी द्वारा दाखिल जवाब में उनके खिलाफ याचिका दाखिल किए जाने का विरोध किया है.
स्पेशल जज डॉक्टर विशाल गोगने की कोर्ट रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई कर रहा है. यह रिविजन पिटीशन वकील विकास त्रिपाठी ने दायर किया है. सोनिया गांधी ने कोर्ट से कहा है कि उनके खिलाफ दायर याचिका में कोई आधार नही बताया गया है, लिहाजा याचिका को खारिज किया जाए. कोर्ट 21 फरवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
सोनिया गांधी पर FIR का मांग
दायर याचिका में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 11 सितंबर को विकास त्रिपाठी की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सेंशन कोर्ट में याचिका दायर की है. दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज करा दिया गया था. यह याचिका विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी.
दायर याचिका में सोनिया गांधी को लेकर दावा
दायर याचिका में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था. जबकि आधिकारिक तौर पर वह अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनीं. याचिका में कहा गया था कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है, लेकिन 1980 में सोनिया गांधी की स्थिति अलग थी.
याचिका में सवाल उठाया गया था कि नई दिल्ली लोकसभा सीट पर वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम कैसे शामिल था? हालांकि बीजेपी ने पहले आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने नागरिकता मिलने से पहले ही वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लिया था.
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पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
पिछली सुनवाई में वकील ने कहा था कि 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने का मतलब है कि कुछ जाली दस्तावेज जमा किए गए थे और यह एक संज्ञेय अपराध का मामला है. इसलिए सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए.
याचिकाकर्ता के वकील पवन नारंग ने कोर्ट को बताया था कि 1982 में दो लोगों के नाम सूची हटाए गए थे, संजय गांधी, जिनकी मौत हो चुकी थी, और सोनिया गांधी. उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के पीछे दो ही संभावित कारण होते है- या तो व्यक्ति को किसी अन्य देश की नागरिकता मिल चुकी हो या फिर उसने दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म भरा हो. दोनों स्थिति में नागरिक होना अनिवार्य है.
शिकायतकर्ता के अनुसार सोनिया गांधी मूल रूप से इटली की नागरिक थी और उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल किया. लेकिन इससे पहले ही 1981 और 1982 उनका नाम नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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