Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर एक अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने फोटोकॉपी पावर ऑफ अटॉर्नी पर हुई जमीन की बिक्री को अवैध करार देते हुए उसे रद्द कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि किसी दस्तावेज की फोटोकॉपी मात्र सेकेंडरी एविडेंस होती है और जब तक भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 की शर्तों पूरी न हों, वह सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं हो सकती.
केरल हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस. वी. एन भट्टी की पीठ ने केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि धारा 64 के तहत मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है. सेकेंडरी एविडेंस तभी स्वीकार किया जाएगा जब यह साबित किया जाए कि मूल दस्तावेज खो गया है, नष्ट हो गया है, विपक्षी पक्ष के पास है या फिर वह सार्वजनिक दस्तावेज है.
प्रबंधन के लिए दी थी अटॉर्नी, भाई ने बेची संपत्ति
बता दें कि यह विवाद वर्ष 1998 में जारी किए गए पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ा है. याचिकाकर्ता महिला ने दावा किया था कि उन्होंने अपने भाई को केवल संपत्ति के प्रबंधन के लिए सीमित पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी और संपत्ति बेचने से संबंधित सभी क्लॉज उन्होंने काट दिए थे. जबकि प्रतिवादियों का कहना था कि महिला ने अपने भाई को जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी, जिसके तहत वह संपत्ति बेच सकता था. इसी आधार पर भाई ने संपत्ति अपने ससुराल पक्ष के लोगों के नाम बेच दी.
निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
निचली अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला देते हुए बिक्री को शून्य करार दिया था. जिसे चुनौती दी गई और फर्स्ट अपीलेट कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए बिक्री को वैध मान लिया. जिसके बाद केरल हाई कोर्ट मामला पहुचा. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा जिसपर सभी.पक्षों की जिरह के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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