भारतीय राजनीति की सबसे सशक्त और प्रिय आवाजों में से एक, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी की आज 74वीं जयंती है. “डिजिटल कूटनीति” की शुरुआत करने वाली और विदेश में फंसे हर हिंदुस्तानी के लिए एक उम्मीद की किरण बनने वाली सुषमा जी को आज पूरा देश याद कर रहा है. राजनीति के गलियारों से लेकर आम जनता के दिलों तक, उनकी कमी आज भी महसूस की जाती है. इस खास मौके पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है.
राष्ट्रहित के विषयों पर निर्भीकता की पहचान
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सुषमा स्वराज जी को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ‘संगठन से सरकार तक जनकल्याण को अपने जीवन का ध्येय बनाने वाली सुषमा स्वराज जी राष्ट्रहित के विषयों पर निर्भीकता के लिए जानी जाती थी.’
संगठन से सरकार तक जनकल्याण को अपने जीवन का ध्येय बनाने वाली सुषमा स्वराज जी राष्ट्रहित के विषयों पर निर्भीकता के लिए जानी जाती थी। देश, संस्कृति, भाषा, विदेश नीति व नारी सशक्तीकरण के उनके कार्य दशकों तक देशवासियों को प्रेरणा देते रहेंगे।
सुषमा जी को उनकी जयंती पर नमन करता हूँ।— Amit Shah (@AmitShah) February 14, 2026
अमिथ शाह ने आघे लिखा कि देश, संस्कृति, भाषा, विदेश नीति व नारी सशक्तीकरण के उनके कार्य दशकों तक देशवासियों को प्रेरणा देते रहेंगे. सुषमा जी को उनकी जयंती पर नमन करता हूं.”
भारतीय राजनीति की ‘शानदार’ विरासत
सुषमा स्वराज जी का राजनीतिक सफर किसी मिसाल से कम नहीं है. मात्र 25 साल की उम्र में हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया था. वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और भारतीय विदेश नीति को एक मानवीय चेहरा दिया. एक दौर था जब लोग ट्विटर पर उन्हें अपनी समस्या बताते थे और कुछ ही घंटों में विदेश मंत्रालय की मदद उन तक पहुंच जाती थी. चाहे इराक में फंसी नर्सों की रिहाई हो या गीता की वतन वापसी, उन्होंने साबित किया कि कूटनीति सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर लोगों की मदद के लिए होती है.
नारी सशक्तीकरण की मिसाल
अमित शाह ने अपने ट्वीट में जिस नारी सशक्तीकरण और भाषा प्रेम का जिक्र किया है, वह सुषमा जी के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा था. वे संसद में जब हिंदी या संस्कृत में भाषण देती थीं, तो विपक्षी नेता भी मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते थे. उनकी वाकपटुता और शालीनता ने भारतीय राजनीति में संसदीय गरिमा के ऊंचे मापदंड स्थापित किए.
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-भारत एक्सप्रेस
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