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लैंड फॉर जॉब से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में लगे आरोपों को स्वीकर करने से तेज प्रताप यादव ने किया इनकार

बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपने ऊपर लगे आरोप स्वीकार करने से इनकार किया और पेशी से छूट की मांग की, जिसे स्पेशल जज विशाल गोगने ने स्वीकार किया है.

लैंड फॉर जॉब मामले में कथित आरोपी और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपो को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. साथ ही उन्होंने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पेशी से छूट की मांग की. स्पेशल जज डॉक्टर विशाल गोगने ने पेशी से छूट देते हुए कहा कि यदि भविष्य में शारीरिक उपस्थिति का आदेश दिया जाता है तो उन्हें उपस्थित होना होगा.

इससे पहले 16 फरवरी को पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी सहित अन्य ने आरोपों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को स्वास्थ्य आधार पर व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दिया था. सुनवाई के दौरान लालू और राबड़ी देवी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि दोनों का स्वास्थ्य ठीक नही है, लिहाजा पेशी से छूट दी जाए. जिसके बाद कोर्ट ने पेशी से छूट दे दिया.

मीसा, तेजस्वी और हेमा ने आरोपों से इनकार किया

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पेशी से छूट देते हुए अपने आदेश में कहा था कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव को 1 फरवरी से 25 फरवरी के कभी भी पेश हो सकते है. जिसके बाद लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य पेश हुए. वही इस मामले में अन्य आरोपी मीसा भारती, तेजस्वी यादव और हेमा यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वो ट्रायल का सामना करेंगी. 9 मार्च से इस मामले में दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी. पिछली सुनवाई में राऊज एवेन्यु कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिया था.

वही कोर्ट ने 98 आरोपियों में 52 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया था. स्पेशल जज विशाल गोगने ने अपने फैसले में कहा था कि लालू का परिवार एक सिंडिकेट की तरह काम किया. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, कुछ सेलडीड को छोड़कर, जमीन खरीद के लिए ज्यादातर पैसों का लेनदेन कैश में हुआ. सीबीआई ने मामले में आईपीसी की धारा 120 बी, धारा 420, 468,467, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 11, 12, 13, 8,9 के तहत चार्जशीट दाखिल किया था.

लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में जमीन और भर्ती घोटाले का आरोप

पिछली सुनवाई में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा था कि उन्होंने जमीन खरीदा था, जिसके बदले पैसे दिए थे. उनके वकील ने यह भी कहा था कि पैसे लेकर जमीन खरीदना कोई अपराध नही है. उन्होंने कहा था कि किसी भी आरोपी को कोई फायदा नही पहुचाया गया. इन लेन देन का आपस में कोई संबंध नही है. राबड़ी देवी के वकील ने कोर्ट से यह भी कहा था कि सीबीआई को लगे आरोपों की जांच करना होगा, और यह साबित करना होगा कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है. आरोप है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप डी कैटेगरी में भर्तियां लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गई.

इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफे में दिए या हस्तांतरित किए. बता दें कि सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेलमंत्री रहने के दौरान सेंट्रल रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियों के बदले में लालू और उनके परिवार को सस्ते दामों में जमीन ली थी. एजेंसी ने इस मामले में 103 लोगों को आरोपी बनाया है. जिनमे से 5 लोगों की मौत हो चुकी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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